बुढ़ापे में छिन गई पिता की बैशाखी, गम में पूरा गांव

0

परवेज़ अख्तर/सिवान :- जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के खालिसपुर गांव के फखरुजोहा के पुत्र रिजवान की मौत से पूरा गांव गम के माहौल में डूबा हुआ है। बेटे को खोने का गम ऐसा है कि परिवार के सदस्य कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। गम के आंसूओं को पोछते हुए पिता फखरुजोहा ने बताया कि बड़े अरमान से बेटे को विदेश कमाने के लिए भेजा था। बेटा इतना अजिज था कि उसे विदेश में अकेला ना रहना पड़े इसलिए अपने भाई के पास भेजा ताकि उसे भी पराए देश में अपनों से दूर रहने का गम ना सताए, लेकिन यह कौन जानता था कि रमजान के पाक महीने में ऐसी मनहूस खबर मिलेगी। रमजान में तो अल्ला शैतानों को कैद कर देता है लेकिन उपर वाले का यह कैसा इंसाफ की उसे दरिंदों ने पाक महीने में ही मुझसे छीन लिया। आंसूओं को पोछते हुए फखरुजोहा ने बताया कि अभी एक बेटी कुंवारी है। जिसकी शादी रिजवान के आने के बाद करने की तैयारी चल रही थी। सोचा था कि रिजवान जब विदेश से अपने घर आएगा तो उसके साथ परिवार के सारे सदस्य बैठकर शादी की तैयारियों के बारे में चर्चा करेंगे। बता दें कि मृतक के पिता फखरु जोहा शहर के श्रीनगर में बैकरी का दुकान चला यहां अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। फखरुजोहा को दो पुत्र हैं जिनमें रिजवान आलम बड़ा और मो. अब्दुल्लाह छोटा साथ ही तीन पुत्रियों क्रमश: कौसर जीनत, अफसरी खातून एवं जुगनू परवीन भी हैं। भाई की हत्या की जानकारी के बाद पूरा परिवार और रिश्तेदार गम में डूब गया है। बताते चले कि दो पुत्री कौसर जीनत और अफसरी खातून की शादी हो चुकी है। मृतक का छोटा भाई मो. अब्दुल्लाह जो शहर के इस्लामियां कॉलेज में बीए पार्ट वन का छात्र है। रिजवान आलम की हत्या के बाद परिजनों के साथ-साथ पूरा गांव मर्माहत है।

ट्रेन में मिली हत्या की सूचना तो कौसर हो गई बेसुध

छत्तीसगढ़ से अपने घर ईद की खुशियां मनाने आ रही बहन कौसर जीनत और बहनोई तारिक हुसैन सिद्दीकी को क्या पता था कि ईद की सारी खुशियां पल भर में ही काफूर हो जाएगी। रिजवान की बहन कौसर दुर्ग-भिलाई में अपने पति के साथ रहती है और सारनाथ एक्प्रेस में सवार होकर अपने घर ईद की खुशियां मनाने आ रही थी। लेकिन जैसे ही भाई की हत्या की जानकारी मिली वह ट्रेन में ही बेसुध हो गई। आनन फानन में उसे होश में लाया गया। रोने की आवाज सुनकर ट्रेन में सवार अन्य यात्रियों ने उसे हौसला दिया और दिलासा दिलाते हुए अनहोनी पर दुख जताया। बता दें कि मृतक का बहनोई का घर भी खालिसपुर गांव में ही है। कौसर के घर पहुंचने के बाद माहौल और गमगीन हो गया है।

बेटे के गम में मां हुई बेसुध

बेटे रिजवान के गम में उसकी मां सुबह तारा खातून का रोते-रोते बुरा हश्र हो गया है। रोते-रोते उसके रिमझिम आंखों के आंसू ही सूख गए हैं। उसे क्या पता कि मेरा पुत्र मुझे ठुकरा कर जिंदगी के उस दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देगा। कि जहां मेरे रिमझिम आंखों के आंसू ही सुख जाएंगे।

रिजवान की मौत की सूचना पर रो पड़ा गांव

… और जैसे ही रिजवान की मौत की सूचना सोमवार की शाम खालिसपुर गांव में मिली तो क्या बूढ़े, क्या नौजवान सबकी आंखों से आंसू बहने लगे और देखते ही देखते मृतक के दरवाजे पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने लगे। पूरे गांव में रात भर मातम का माहौल रहा। उधर विदेश में रह रहे रिजवान के चाचा कमरुल जोहा भतीजे के शव के पोस्टमार्टम के बाद कागजी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।​