कल आएगा नतीजा, चाचा या भतीजा !

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  • बिहार के 243 सीटों पर हुए चुनाव का मतगणना कल
  • बिहार के सभी मतगणना केंद्र दुल्हन की तरह सज धज कर हुआ तैयार

परवेज़ अख्तर/सिवान:
बिहार विधान सभा चुनाव के दरमियान 243 सीटों पर हुए चुनाव का मतगणना कल यानी मंगलवार को होगी। ईवीएम में कैद बिहार के दो राजाओं का फैसला मंगलवार को स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार में चाचा या भतीजा ! यहां बताते चले कि मतगणना को लेकर बिहार के सभी जिला मुख्यालय में मतगणना केंद्र दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार है। सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी मतगणना कक्ष पर पैनी नजर रखे हुए हैं। प्रशासन की गाड़ियां मंगलवार को होने वाली मतगणना को लेकर सड़कों पर सरपट दौड़ रही है। उधर असामाजिक तत्वों पर बिहार के सभी जिलों के पुलिस कप्तान पैनी नजर रखे हुए हैं। यहां बताते चले कि बिहार में मुख्य रूप से एनडीए गठबंधन तथा महागठबंधन के बीच जोरदार लड़ाई माना जा रहा है। पूरे बिहार में हो रही लगातार चुनावी बहस पर मंगलवार को विराम लग जाएगा। दोनों गठबंधन के कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी – अपनी खुशी का इजहार करने के लिए कई तरह से मनोकामना बना चुके हैं।

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अब देखना होगा कि बिहार की गद्दी पर एनडीए गठबंधन की ओर से सूबे के वर्तमान मुखिया श्री नीतीश कुमार विराजमान होंगे या महागठबंधन की ओर से श्री तेजस्वी यादव के सर पर ताज बंधेगा ! यहां बताते चले कि इस बार के चुनाव में लोगों में काफी उत्साह देखी गई है। लोगों ने दलगत की भावनाओं से ऊपर उठकर अपने- अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। तथा मतदाताओं द्वारा दी गई मत ईवीएम में कैद है। बिहार के प्रत्येक हिस्सों जो खबर मिल रही थी कि लोग चाय की चुस्की के साथ चुनावी बहस में लग जाते थे। प्रत्येक छोटी बड़ी दुकानों पर विधानसभा की महफिल सजती थी। कई लोग नई सरकार का गठन करते थे तो कई लोग पुनः इसी सरकार को रिनुअल की बात का कर चुनावी आंकड़ा मिलाने में व्यस्त हो जाते थे। इन सब कयासों पर मंगलवार को विराम लग जाएगा।

उधर बिहार के कई हिस्सों से यह भी खबर आ रही है कि प्रत्येक टीवी चैनलों द्वारा दी गई आंकड़ा से कितने लोग उत्साहित हैं तथा कितने लोग धाराशाही हो गए हैं। कुछ लोग चुनावी आंकड़ा को सही तो कुछ लोग गलत बता रहे हैं। बहरहाल चाहे जो हो सोमवार की रात एनडीए गठबंधन तथा महागठबंधन के जितने भी प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में हैं उनके लिए सोमवार की रात रतजगा बनकर सामने आई है। उनकी रातें कैसे कटेगी यह कहना मुश्किल हो पा रहा है। क्योंकि इंतजार की घड़ियां बहुत लंबी होती है।