इंसानियत बरकरार! जब अपनों ने किया इंकार तब मुस्लिम भाइयों ने हिंदू महिला की अर्थी को दिया कंधा

0

पटना: कोरोना जैसी महामारी जिसमे अपने भी मुँह मोड़ ले रहे है वहा मुस्लिम भाइयों ने दिखाई इंसानियत। सामान्य बीमारी से भी मौत हो जाने पर पड़ोसी-रिश्तेदार नहीं पहुंच रहे हैं। अपने घरों के दरवाजे तक बंद कर ले रहे हैं। उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा सता रहा है। ऐसी ही घटना गया के इमामगंज में घटी। तेतरिया के दिग्विजय प्रसाद की 58 वर्षीया पत्नी पार्वती देवी की मौत लंबी बीमारी के कारण घर पर ही हो गयी।

विज्ञापन
pervej akhtar siwan online
aliahmad
dr faisal

मौत की खबर गांव में फैलते ही सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिये। कोई उसकी अर्थी को कंधा देने को तैयार नहीं था। रानीगंज के मुस्लिम युवाओं को जब इसकी जानकारी मिली, तब उन लोगों ने तय किया कि वे उस महिला की अर्थी को कंधा भी देंगे और अंतिम संस्कार भी करेंगे।

इन युवाओं ने हिंदू रीति-रिवाज से अर्थी तैयार की और श्मशान तक ले गये। वहां चिता सजायी और दाह संस्कार कर सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश की। अंतिम संस्कार में शामिल मो. सगीर आलम और मो. रफीक मिस्त्री ने कहा- रमजान में यह पवित्र कार्य करने का अवसर मिला। मन को बड़ा सुकून मिला। अंतिम संस्कार में मो. सुहैल, फारूक उर्फ लड्डन, हाफिज कलीम, हेरार आलम, मो.शारिक, मो.उमर और मृत महिला के बेटे निर्णय कुमार, विकास कुमार और बसंत यादव शामिल हुए।