पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की हुई आकस्मिक निधन को लेकर बिहार की राजनीति में आई अचानक सी उफान

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  • पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने उठाई न्यायिक जांच की मांग
  • शहाबुद्दीन का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाए

परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ :

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सीवान से आरजेडी के पूर्व सांसद डॉ. मो. शहाबुद्दीन की हुई आकस्मिक निधन को लेकर बिहार की राजनीति में अचानक उफान आ गई है। न्यायिक जांच की मांग परिजनों व समर्थकों के द्वारा लगातार उठाई जा रही है।

इसी बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शहाबुद्दीन के निधन के मसले पर शासन व प्रशासन से सोशल मीडिया पर ट्वीट करके सवालों के घेरे में डाल दिया है। श्री मांझी ने इस प्रकरण को लेकर न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही शहाबुद्दीन का अंतिम संस्कार भी पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने की बात को भी दोहराया है। जीतन राम मांझी ने ट्वीट करते हुए उल्लेख किया है कि माननीय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री और नीतीश कुमार जी से आग्रह है कि सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के निधन की जांच कराई जाए एवं उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान किया जाए।

पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने भी शहाबुद्दीन की निधन को लेकर कहा की कोई न कोई राज जरूर है। जो सामने आना चाहिए। मालूम हो कि शहाबुद्दीन का निधन शनिवार को दिल्ली के डीडीयू अस्पताल में हो गई थी। सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन सिवान के चर्चित तेजाब हत्या कांड में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे थे। जहां उनकी तबीयत बिगड़ने को लेकर इन्हें इलाज के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन की अनुमति पर डीडीयू अस्पताल भेजा गया था।शहाबुद्दीन की निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत उनकी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने शोक प्रकट किया था।

उन्हें पिछले महीने 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले सुबह से पूर्व सांसद के निधन की खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी। लेकिन इन खबरों का तिहाड़ जेल प्रशासन लगातार खंडन कर रहा था। जेल प्रशासन ने कहा था कि पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की हालत गंभीर है और उनका दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के आईसीयू में इलाज चल रहा है।

जेल प्रशासन की ओर से इन खबरों को अफवाह बताया गया। शनिवार की दोपहर तिहाड़ जेल के डीजी की ओर से आधिकारिक सूचना जारी कर शहाबुद्दीन के निधन की जानकारी दी गई। कोरोना संक्रमण की वजह से हालत बिगड़ने के बाद उन्हें आईसीयू में दाखिल किया गयाा था। उसके बाद से ही उनकी हालत गंभीर होने की खबरें सामने आ रही थी।

यहांं बताते चले कि शहाबुद्दीन के खिलाफ तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले चल रहे थे। तिहाड़ जेल जाने से पहले वे बिहार के भागलपुर और सीवान के जेल में भी लंबे समय तक सजा काट चुके हैं। साल 2018 में जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए, लेकिन जमानत रद्द होने के कारण उन्हें वापस जेल जाना पड़ा। 15 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राजद सांसद को सीवान से तिहाड़ जेल लाने का आदेश दिया था।