सिवान सदर से जनता दल के टिकट पर पहली बार 1985 में विधायक बने थे अवध बिहारी चौधरी

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  • छह बार बिहार विधान परिषद का सदस्य रह चुके हैं अवध बिहारी चौधरी
  • 17 अगस्त 1954 को सदर प्रखंड के जियांय में हुआ था जन्म

✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ:
बिहार सहित सीवान की राजनीत को बेहद करीब से देखने व समझने वाले अवध बिहारी चौधरी का बिहार विधानसभा के अध्यक्ष बनने का सफर काफी दिलचस्प रहा है.17 अगस्त 1954 को सीवान के जियांय में एक किसान परिवार में जन्मे अवध बिहारी चौधरी छह बार विधायक रहे हैं.इनके पास चार दशक का सियासी अनुभव है.एक राजनेता के तौर पर जमीन से जुड़ेने का अनुभव ही इनको आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के काफी करीब लाया. बाद में लालू प्रसाद यादव के बेटा व उप मुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव से भी इनके अच्‍छे संबंध हुए. अवध बिहार चौधरी,जनता दल के टिकट पर पहली बार 1985 में सीवान सीट से विधायक बने थे. बाद में जब लालू प्रसाद यादव ने आरजेडी बनाई तो उनके साथ हो लिए. इसके बाद साल 2005 तक लगातार सीवान से विधायक रहे. इस दौरान वह सरकार में मंत्री भी रहे है और कई विभागों की जिम्मेदारियां भी संभाली. अपने चाहने वालों के बीच ये एबीसी के नाम से पापुलर हैं.

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2014 में थामा था जेडीयू का दामन

2015 में बिहार की सत्ता बदली तो इन्हों लगातार हार का मुंह देखना पड़ा.अवध बिहारी चौधरी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद आरजेडी का दामन छोड़कर जेडीयू का हाथ थाम लिया. लेकिन जेडीयू ने विधानसभा उपचुनाव के दौरान सीवान सीट से अवध बिहारी चौधरी को टिकट न देकर बबलू चौहान को दे दिया. तब अवध बिहारी निर्दलीय चुनाव लड़े, लेकिन हार गए.इसके बाद 2017 में जेडीयू छोड़कर फिर आरजेडी में चले गए. आरजेडी ने एक बार फिर साल 2020 में सीवान सदर विधानसभा सीट से उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया और जीत का सेहरा उनके सिर बधा.इनके सियासी सफर की बात करें तो ये 1985,1990,1995, 2000 और फरवरी, 2005 में विधायक चुने गए थे.फिर 2020 में भी विधायक बने.