जिन शिक्षकों को तनख्वाह मिलती है, उसी का लेखा-जोखा बिहार सरकार के पास नहीं, क्या है गायब फोल्डर का पूरा मामला जानिए

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पटना: जब हाईकोर्ट का डंडा चलता है तो सरकार की नींद खुलती है। जब हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों का लेखा-जोखा जमा करने का आदेश दिया तो इसके बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि शिक्षा विभाग का कहना है कि 1लाख 10 हजार नियोजित शिक्षक का लेखा-जोखा उनके पास है ही नहीं। अब क्या होगा, अब होगा भी तो कैसे, क्योंकि शिक्षा विभाग की तरफ से सभी नियोजित इकाइयों को आदेश दिया गया है कि 23 दिसंबर तक लापता सभी फोल्डर स्कोर विभाग में जमा किया जाए।यह हाल है बिहार का। जहां सरकार जिस को तनख्वाह देती है उसी का लेखा-जोखा उनके पास नहीं है।

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हद है यह। पांच साल से सरकार 110000 नियोजित शिक्षकों का लेखा-जोखा नहीं जुटा पाई है। इस बात को शिक्षा विभाग खुद मान रहा है और जब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई तो विभाग की नींद खुली है लेकिन शिक्षक संघ का दावा है की फोल्डर जमा कर दिए गए हैं। जबकि राज्य सरकार उन्हें परेशान कर रही है।

शिक्षकों ने कहा है कि गायब का बहाना बनाकर शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है फोल्डर गायब है तो वेतन नहीं देंगे यह राज्य के विभिन्न योजनाओं ने यह काम किया है कि फोल्डर गायब के नाम पर अब शिक्षकों को परेशान किया

पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एक बार फिर नियोजित शिक्षकों के गायब फोल्डर खोज शुरू हो गई है और शिक्षा विभाग एक्शन में है, लेकिन असल मसला क्या है यह भी जानना जरूरी है।

क्या गायब फोल्डर का मामला

साल 2014 में पटना हाईकोर्ट में नियोजित शिक्षकों क फोल्डर्स को लेकर केस फाइल किया गया। ऐसे शिक्षक जिन्होंने फर्जी डिग्री पर नौकरी ली, उन्हें क्षमादान का विकल्प दिया गया। जिसके बाद 3000 नियोजित शिक्षकों ने इस्तीफा दिया और इनसे कोई हर्जाना नहीं वसूला गया। पिछले 5 साल से निगरानी विभाग फोल्डर्स की जांच कर रहा है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।

अब इस मामले में सुनवाई अगले महीने यानी 2021 में हाई कोर्ट में होगी। खुद निगरानी विभाग का हाई कोर्ट में काउंटर एफिडेविट जमा कर कहा है कि 110000 से अधिक फोल्डर जमा नहीं है। आशंका जाहिर की जा रही है कि बिहार में इतनी संख्या में फर्जी डिग्री देकर नौकरी ली गई है, जिसके वेतन पर करीब ₹1अरब खर्च हो चुके हैं। अब जाकर प्राथमिक शिक्षा विभाग ने हर हाल में 23 दिसंबर तक फोल्डर जमा करने के लिए कहा है।

कई जानकारों का मानना है कि अगर ठीक से वेरीफिकेशन होगा तो पाया जाएगा कि 110000 से अधिक टीचर जाली सर्टिफिकेट के आधार पर काम कर रहे हैं। अगर 110000 ही मान लीजिए और इन पर औसतन 20 हजार रुपए ही प्रतिमाह रख लें तो कितना सरकारी पैसा जा रहा है। जो शिक्षक खुद शिक्षित नहीं हैं तो वो बच्चों को क्या पढ़ाएंगे। ये साफ तौर पर उनके भविष्य से खिलवाड़ करना है।

अब इंतजार कीजिए 23 दिसंबर का, क्योंकि फिर पता चलेगा कि गायब फोल्डर जमा हुआ कि नहीं या फिर नई तारीख दे दी गई। क्योंकि 5 साल से तो गायब फोल्डर खोजे ही जा रहे हैं। अब आप इसी से समझ लीजिए कि यह बिहार में कितना बड़ा घोटला है। क्यों नहीं मिल रहे गायब फोल्डर।