होम आइसोलेशन में भर्ती कोरोना मरीजों की हिट एप के माध्यम से होगी निगरानी

0
corona
  • राज्यस्तर पर पदाधिकारियों को दिया गया ऑनलाइन प्रशिक्षण
  • एएनएम प्रतिदिन लेंगी मरीजों का तापमान व ऑक्सीजन रेट

✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ:
जिले में होम आइसोलेशन में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विभिन्न माध्यमों से की जा रही है।अब मोबाइल एप के माध्यम से मरीजों की निगरानी की जायेगी। हिट मोबाइल एप के माध्यम से मरीजों की निगरानी होगी। इसको लेकर राज्य स्तर पर जिलास्तरीय पदाधिकारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है। अब होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग “हिट-कोविड एप” द्वारा ही की जाएगी। “हिट-कोविड एप” से मॉनिटरिंग की शुरुआत पिछले वर्ष 17 मई को की गई थी । इससे करीब डेढ़ लाख मरीजों की मॉनिटरिंग की गई थी। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों की भी हिट एप से निगरानी होगी। सूचना प्रावैधिकी विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी रखी जाएगी।

विज्ञापन
pervej akhtar siwan online
ahmadali
ADDD

कैसे होगी निगरानी:

एप संबंधित क्षेत्र की एएनएम के टैब में होगा। वह अपने अपने क्षेत्र में होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की पूरी निगरानी करके उनका पूरा डेटा हर दिन इस एप में अपलोड कर देंगी। इसमें ऑक्सीजन लेवल से लेकर बुखार तक का पूरा लेखा जोखा होगा। इसकी मॉनिटिरंग हर दिन होती रहेगी। एप ऑटो अपडेटेड होगा और ब्लाक, जिला और मुख्यालय से लेकर विभाग तक से कनेक्ट होगा। ऐसे में किसी भी मरीज की हालत में थोड़ा भी इनबैलेंस हुआ तो अलार्म ब्लॉक से लेकर मुख्यालय और विभाग तक को हो जाएगा। इससे संबंधित मरीज को ट्रैक कर उसे अस्पताल भेजने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

एएनएम प्रतिदिन लेंगी मरीजों का तापमान व ऑक्सीजन रेट :

स्मार्टफोन के माध्यम से मरीज का तापमान व ऑक्सीजन रेट हिट एप पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, संबंधित क्षेत्र के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के प्रभारी चिकित्सक व अन्य संबंधित कर्मी जुड़े रहेंगे और मरीज की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उनकी तत्काल सहायता की जा सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के द्वारा मरीजों के घर पर जाकर प्रतिदिन उनके शरीर का तापमान और आक्सीजन स्तर जांच की जायेगी। इस आधार पर उनका उचित इलाज समय पर हो सकेगा. चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के दौरान जिनका आक्सीजन स्तर 94 से कम पाया जायेगा, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर डेडिकेटेड हेल्थ सेंटर में ससमय भर्ती कराकर उनका इलाज कराया जायेगा।