बिहार में बाढ़ से मचा हाहाकर, भागलपुर से पटना के बीच रेल परिचालन ठप, ट्रैक धंसा

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भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार विकराल होती जा रही है। शनिवार को बरियारपुर के पास अप और डाउन लाइन में पानी सट गया। बरियारपुर में लोहापुल के नीचे गटर तक पानी पहुंच गया है। सुबह से एक ही ट्रैक पर अप-डाउन ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा था। लेकिन शाम चार बजे के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया गया। भागलपुर व पटना के बीच ट्रेनें बंद कर दी गई हैं।

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वहीं, एनएच 80 पर तीन से चार फीट तक पानी बहने से भागलपुर के दोनों ओर सड़क मार्ग बंद हो गया है। सबौर व कहलगांव के बीच लोग नाव के जरिए एनएच का पानी वाला हिस्सा पार कर रहे हैं। मुंगेर, खगड़िया व कटिहार में भी लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है। मुंगरे में गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कटिहार में भी गंगा, कोसी व महानंदा के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी है। सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ के पानी मे डूबने से भागलपुर में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

शनिवार शाम को साहिबगंज की ओर से आनेवाली ट्रेनों को भागलपुर में ही टर्मिनेट कर दिया गया। वहीं जमालपुर से कई ट्रेनें रवाना नहीं की गईं। सबसे खतरनाक स्थिति गनगनिया से रतनपुर के बीच है। रेलवे इस पर लगातार नजर बनाये हुए है। डीआरएम मौके के लिए रवाना हो गए हैं। एनएच-80 पर सबौर के पास करीब पांच किलोमीटर की दूरी में पानी बह रहा है। खनकित्ता चौक पर करीब आधा दर्जन नाव से कई गांवों के लोग आना-जाना कर रहे हैं। एनएच-80 पर भागलपुर से सुल्तानगंज के बीच वाहनों के आवागमन को रोक दिया गया है। करीब एक किलोमीटर सड़क पर तीन फीट तक पानी बह रहा है।

सभी चौक चौराहों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। भागलपुर शहरी क्षेत्र के कई मोहल्लों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पानी बढ़ने के कारण लोग ऊपरी मंजिल या छत पर शरण लिए हुए हैं। शहर के कई नए मोहल्लों में भी बाढ़ का पानी फैल रहा है। सीएमएस हाईस्कूल परिसर पानी में डूब चुका है। टीएमबीयू परिसर के बाद सड़क पर पानी बहने लगा है।भागलपुर जिले में 12 प्रखंडों की एक लाख 72 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। 172 गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। प्रशासन द्वारा 90 नावों का परिचालन किया जा रहा है। किसानों की फसलें पूरी तरह डूब चुकी है। लोग ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं। वहीं, बाढ़ राहत शिविरों में प्रशासन की मदद नाकाफी साबित हो रही है।