प्रतिवर्ष बच्चों के कुपोषण दर में 2% एवं किशोरी व महिलाओं के एनीमिया दर में 3% की लायी जाएगी कमी : डीपीओ

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  • पोषण अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की अभिसरण कार्य योजना की बैठक आयोजित
  • आईसीडीएस के डीपीओ की अध्यक्षता में हुई बैठक
  • बैठक में सिविल सर्जन समेत कई अधिकारी हुए शामिल

गोपालगंज : समाहरणालय सभाकक्ष में आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शम्स जावेद अंसारी की अध्यक्षता में पोषण अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की अभिसरण कार्य योजना की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पोषण अभियान का क्रियान्वयन को लेकर जिले में संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का अनुश्रवण एवं समीक्षा की गई। बैठक में डीपीओ ने बताया विभिन्न विभागों के समन्वय से निर्धारित सीमा के अंदर बच्चों में अल्पवजन, बौनापन एवं दुबलापन के दर में कमी लाया जाना है।

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योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विभिन्न विभागों- महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, पंचायती राज इत्यादि विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए बच्चों के कुपोषण दर में प्रतिवर्ष 2% एवं किशोरी व महिलाओं के एनीमिया दर में प्रतिवर्ष 3% की कमी लाने में संयुक्त प्रयास किया जाएगा। इस दौरान डीआरडीए निदेशक, पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सिविल सर्जन डीएन सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ शक्ति कुमार सिंह, जीविका डीपीएम, सभी सीडीपीओ व केयर इंडिया के डिटीएल मुकेश कुमार सिंह, एफपीसी अमित कुमार, राष्ट्रीय पोषण अभियान के जिला समन्यवक बृजकिशोर प्रसाद मौजूद थे।

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पोषण की कमी को सुधार लाना है अभियान का उद्देश्य

डीपीओ शम्स जावेद अंसारी ने बताया राष्ट्रीय पोषण अभियान बड़े पैमाने पर चलने वाला अभियान है, जिसका उद्देश्य बच्चों किशोरियों गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण की कमी में सुधार लाना है। पोषण अभियान देश में मार्च 2018 से लागू किया गया है। इसके तहत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 3 वर्ष का समय निर्धारित किया गया है।

बच्चों में विकास की कमी, कुपोषण, एनीमिया का विशेष ध्यान

पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत बच्चों में विकास की कमी कुपोषण एनीमिया ना हो उसका विशेष ध्यान रखना है. इस अभियान को जन आंदोलन स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। पोषण अभियान के तहत कुछ वर्षों में अलग-अलग निगरानी कर के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।

क्या है उद्देश्य

  • इस योजना के तहत 0 से 6 वर्ष के बच्चों में ठीक ने फोन को कम करना
  • 0 से 6 वर्ष के बच्चों में कुपोषण के कारण वजन की कमी की समस्या में कमी लाना
  • 5 से 59 महीनों वालों छोटे बच्चों में रक्ताल्पता की कमी की समस्या में कमी लाना
  • इस योजना के तहत 15 से 49 आयु वर्ग की किशोरियों एवं महिलाओं में एनीमिया की समस्या में कमी लाना
  • नवजात शिशु के जन्म के समय वजन में कमी की समस्या में कमी लाना

जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में प्रतिवर्ष 2% की कमी लाना

इस अभियान के अंतर्गत जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में प्रतिवर्ष कम से कम 2% की कमी लाना है। साथ ही 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में ठिगनेपन के राष्ट्रीय स्तर 34.6% को कम कर 25% करना है। इसके लिए छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के कुपोषण में कमी लाना जरुरी है. एनीमिया और गंभीर कुपोषण को रोकने के लिए स्तनपान, मातृ पोषण और किशोरावस्था पोषण को बढ़ावा देना जरुरी है.

पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए तकनीक का सहारा 

पोषण अभियान से जुड़ी इंफॉर्मेशन के लिए एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं महिला पर्यवेक्षिका ओपो स्मार्टफोन दिया गया है। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की कद की सही जानकारी संग्रह करने के लिए इन्फैंटोमीटर स्टेडियोमीटर दिया गया है। वजन की कमी का पता लगाने के लिए आंगनबाड़ी सेविका प्रत्येक महीने बच्चों की वजन की जानकारी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर पर देंगी। विकास में रुकावट और ठिगनेपन का पता लगाने के लिए आंगनबाड़ी सेविका हर तीसरे महीने बच्चों की लंबाई ऊंचाई की जानकारी एप्लीकेशन पर देंगी। कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को कुपोषण की जानकारी देकर उन्हें पोषण युक्त आहार की जानकारी देना है।