उत्पाद बैरेक में जब्त शराब की गलत रिपोर्ट बनाना पड़ा महंगा, एफआइआर

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परवेज अख्तर/सीवान :उत्पाद विभाग के बैरेक में जब्त शराब की कम रिपोर्टिंग करना रविवार की सुबह विभाग के अधिकारियों को भारी पड़ गया। इसकी जानकारी किसी ने डीएम को दी। जिसके बाद डीमए ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर उत्पाद विभाग के बैरेक स्थित मालखाना में छापेमारी का निर्देश दिया। छापेमारी में शामिल एसडीओ अमन समीर, एएसपी कांतेश मिश्रा और जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने सुबह ढाई बजे छापेमारी की। छापेमारी के दौरान ढाई घंटे तक मालखाना की जांच की गई। जांच के क्रम में 366 कार्टन शराब पाया गया। जबकि जब्ती रिपोर्ट में 280 कार्टन शराब अवैध दिखाया गया था। इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षक राजेश कुमार सिन्हा व अन्य संबंधित अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए विभागीय कार्रवाई आरंभ करने का निर्देश डीएम ने उत्पाद अधीक्षक को दिया है। बताया जाता है कि 18 सितंबर की रात शहर के तरवारा मोड़ से उत्पाद विभाग ने एक मिनी ट्रक को शराब के साथ जब्त किया था। इसके बाद टीम द्वारा जब्त शराब की गलत रिपोर्ट तैयार कर 280 कार्टन शराब को दर्शाया गया। जबकि जब्त शराब की संख्या अधिक थी। इसकी सूचना किसी ने डीएम को रात्रि में डेढ़ बजे दी। साक्ष्य के रूप में अंडर रिपोर्टेड शराब को उत्पाद कार्यालय में ही छिपाकर रखने की जानकारी दी गई। इसके बाद डीएम ने सदर एसडीओ, सहत तीन सदस्यीय टीम का गठन कर जांच के निर्देश दिए। जांच में बात सही पाए जाने के बाद संबंधितों पर प्राथमिकी के बाद विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

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बैरेक की गेट पर रात में अक्सर होता है रुपये लेकर शराबियों को छोड़ने का खेल

सूत्रों की माने तो उत्पाद विभाग में इस तरह का खेल कोई नया नहीं है। यहां रात्रि में बॉर्डर एरिया से पकड़े गए शराबियों को छोड़ने के लिए जवानों द्वारा मोटी रकम ली जाती है। यह सब यहां तैनात उत्पाद पदाधिकारियों की देखरेख में होता है। पकड़े जाने के डर से ये स्वयं के बजाए सिपाहियों से लेनदेन का काम करवाते हैं और रुपये मिलने के बाद रात में ही उन्हें छोड़ देते हैं। रुपयों की मांग हजारों में होती है। सूत्रों की माने तो बात 50 हजार से शुरू होती है और मोलभाव के बाद जब सबकुछ तय हो जाता है तो शराबियों को छोड़ दिया जाता है।