गोपालगंज: मातमी दर्द पर नहीं लगा सरकारी सहायता का मरहम

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  • आपदा अनुग्रह अनुदान राशि के लिए दौड़ लगा रहे मृतक के परिजन
  • वर्षों से अनुदान राशि के बदले मिल रहा दिलासा

गोपालगंज: अपनों के खाने का दर्द लिये परिजन बिलख रहे हैं. कमाने वाले तो चले गये, लेकिन परिजनों के दर्द पर सरकारी सहायता की मरहम आज तक नहीं लगी है. बात कर रहे हैं हम आपदा ओर सड़क दुर्घटनाओं में जाने गवानें वालों के परिवार की. सड़क दुर्घटना या अन्य प्राकृतिक आपदा में मृत लोगों के लिए सरकार द्वारा आपदा अनुग्रह अनुदान राशि देने का प्रावधान सरकारी नियमावली के तहत है लेकिन इस योजना से प्रखंड में लाभान्वित होने वाले मृतक के परिजनों की संख्या बहुत कम है. जिसे मिल गया वे अपने को भाग्यवान समझ रहे हैं और जिसे नहीं मिला वे लगातार कार्यालयों के चक्कर काट कर अपनी चप्पल घिस रहे हैं. किसी दुर्घटना में अपने परिजनों को खोने के बाद अनुदान राशि पाने के लिए केवल मृत्यु होना ही काफी नहीं, बल्कि इसे पाने के लिए बड़ी पैरवी जब तक न हो, यह राशि नहीं मिलती है. मृतकों के बेसहारा और दुःखी परिजन दौड़ते-दौड़ते आखिर में सब भगवान भरोसे छोड़कर चुप बैठ जाते हैं. ऐसा नहीं कि प्रखंड में यह राशि किसी को नहीं मिली, उनको जरूर मिली है जिनके पास उचित पैरवी थी. राशि पाने वालों का प्रतिशत करीब 30 है, जबकि नहीं पाने वालों की संख्या 70 फीसदी है. मृतकों के परिजन जब अंचल कार्यालय में जाते हैं तो उनको एक ही जवाब मिलता है कि अभी इस कोष में पैसे नहीं हैं, आते ही भेज दिए जायेगें.

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केस स्टडी 1. मिर्जापुर के राजकली कुंवर की मौत मिर्जापुर में सड़क दुर्घटना में 26 अगस्त 2017 को हो गयी, लेकिन अब तक परिजनों को कोई लाभ नहीं मिला.
केस स्टडी 2. सलोना के लवंगी देवी की मौत बरौली-बढ़ेयां पथ पर 22 नवंबर 19 को हो गयी, लेकिन उनके परिजन आज भी अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं.
केस स्टडी 3. सरफरा के अनिरूद्ध तिवारी की मौत बाढ़ के पानी में सर्पदंश से हुई, आज तक परिजन लाभ के लिए दौड़ रहे हैं.
केस स्टडी 4. बतरदेह के आकाश कुमार की मौत 21 जुलाई 20 को पानी में डूबने से हुई, परिजनों को आज भी अनुग्रह राशि का इंतजार है.
केस स्टडी 5. पचरूखिया के रमन तिवारी की मौत 02. अगस्त 20 को बाढ़ के पानी में डूबने से हुई, परिजन कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं.
केस स्टडी 6. सलोना के उजेन्द्र महतो की मौत 17 जुलाई 20 को हाइवे पर हुई, यह मामला भी लटका हुआ है. इसके अलावा बतरदेह के श्रीराम सिंह की मौत बरहिमा में सउ़क दुर्घटना में हुई, खजुरिया के बीडीसी बलिराम सिंह के भाई की मौत भी सड़क दुर्घटना में हुई, आदि के अलावा दर्जनों मामले ऐसे हैं जिनमें मृतक के परिजन दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन अब तक मामला ज्यों का त्यों है.

कहते हैं अधिकारी

इस सम्बंध में अधिकारी कृष्णकांत चौबे ने बताया कि सभी मामले संज्ञान में हैं, आपदा राहत कोष में अभी राशि की कमी है, जिससे अनुदान राशि नहीं दी गयी है. कोष में पैसे आते ही सभी मामलों में राशि दे दी जायेगी.