गुठनी: राम मानव जीवन के मूलभूत सिद्धांत के साथ आज भी प्रेणाश्रोत: राजन जी

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  • कथा के पहले दिन भगवान की कथा सुनकर लोग झूम उठे
  • कथा में भजन कीर्तन करके मौजूद लोगो को किया मंत्रमुग्ध

परवेज अख्तर/सिवान: जिले के गुठनी प्रखंड के चुपचुपवा गांव में बुधवार को राम कथा वाचक राजन जी ने कथा के पहले दिन राम चरित्र पर चर्चा किया। उन्होंने कथा के पहले दिन आधुनिक समाज में बयाप्त कुरीतियों पर प्रहार किया। और कहा की रामराज्य में हर किसी को जीने, रहने, बोलने, शिक्षा ग्रहण करने, व्यापार करने का पूरा अधिकार था। उनके सम्पूर्ण जीवन में उनके प्रजा में सदैव खुशहाल थी। अपने कथा के माध्यम से कथावाचक राजन जी ने बताया की अगर मनुष्य अपने अंदर मौजूद लोभ, लालच, घृणा, अहंकार, कपट को त्याग कर दे।

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तो आज के दौर में भी धरती पर रामराज दिखने लगेगा। कथावाचक राजन जी ने कहा की उन्होंने बनवास के कारणों का भी अपने पिता दशरथ से नहीं पूछा। और नहीं अपने दंड का वजह। इससे राम का व्यक्तित्व और कद बड़ा हो गया। क्यूंकि राम अगर वन को नही जाते तो वह कभी भी मर्यादा पुरुषोत्तम नही कहलाते। उनका वन जाना उनके जीवन का सुखद संयोग सबिता हुआ। कथा के माध्यम में भजन कीर्तन सुना कर लोगों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान मौजूद सैकड़ों लोगों ने भजन कीर्तन का कर झूम उठे।