एक वर्ष में कोरोना का समुचित इलाज नहीं, तो लॉकडाउन से कैसे भागेगा कोरोना ?

0
  • अब अगर बिहार सरकार लॉक डाउन लगाती है तो लोग होंगे भुखमरी के शिकार
  • पूर्व में लगे लॉक डाउन की वजह से अब तक गरीबों के हालात नहीं सुधरे
  • छोटे छोटे व्यापारियों पर पड़ा बुरा प्रभाव तो बड़े बड़े व्यापारियों की कटी चांदी
  • कोरोना का वैक्सीन डबल डोज लेने के बाद सदर अस्पताल में तैनात कई चिकित्सा पदाधिकारी पुनः हुए पॉजिटिव

परवेज अख्तर/सिवान:
भले बिहार में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर बिहार सरकार लॉकडाउन लगाने के फिराक में है।क्या इससे कोरोना टल जायेगा ? या पीड़ित लोगों की हो रही मृत्यु की दर में कमी आयेगी ? यह सवाल खुद का नहीं बल्कि आम जनमानस का है ! सिवान सदर अस्पताल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारत सरकार द्वारा बना कोरोना का वैक्सीन डबल डोज लेने के बाद सदर अस्पताल में तैनात चिकित्सा पदाधिकारियों में क्रमशः डॉ कालिका सिंह,डॉ अरुण कुमार चौधरी व कई नर्सिंग स्टाफ पुनः कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।अब इस भारत सरकार द्वारा बना वैक्सीन लोगों के बीच कई तरह के सवाल खड़े कर दिए है ? तो कई लोग इस वैक्सीन को अमृत समझ डोज लेने के लिए सदर अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं।यहां बताते चले कि वैक्सीन का डोज लेने के लिए सदर अस्पताल में इन दिनों घंटों लाइन लग रहा है।लोगों की तादाद के मद्देनजर वैक्सीन की फाइलें भी खत्म हो जा रही है।यहां लॉक डाउन पर प्रकाश डाले तो आखिर बिहार सरकार क्यों लॉक डाउन लगाने पर तुली हुई है।हालात तो यह है कि अभी बिहार में लॉकडाउन की शुरुआत पूर्ण रूप से नहीं हुई की अभी से हीं लोगों में एक असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिले के विभिन्न बाजारों से जो सूचनाएं प्राप्त हो रही है उससे यह स्पष्ट जाहिर होता है कि बाजारों की रौनक घटने से अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा हुआ है।

विज्ञापन
WhatsApp Image 2023-01-25 at 10.13.33 PM
pervej akhtar siwan online
WhatsApp Image 2022-08-26 at 8.35.34 PM
WhatsApp Image 2022-09-15 at 8.17.37 PM

लोगों में ऐसी आशंका उत्पन्न हो गई है कि अगर बिहार सरकार द्वारा लंबे समय तक लॉकडाउन लगाती है तो हम सभी के बीच भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। फिलहाल बाजारों का आलम यह है कि दुकानदार अपनी अपनी दुकान समय से खोलकर व सरकार के दिशा निर्देश का अनुपालन करते हुए समय से बंद कर दे रहे हैं।लेकिन बाजारों की बिगड़ती स्थिति के कारण उनके बिक्री पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा हुआ है।छोटे-छोटे व्यवसायियों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है तो वहीं बड़े बड़े व्यापारियों की चांदी कट रही है।छोटे छोटे व्यवसाई बंधु सुबह से अपनी अपनी दुकानें खोल ग्राहकों की आने की आहट पर टकटकी लगाए बैठे हुए हैं।लेकिन कोरोना संक्रमण का दंश झेल रहा अर्थव्यवस्था से चौपट जिले के छोटे छोटे व्यवसायियों के बीच ऐसी कई समस्या उत्पन्न हो गई है कि अब जाएं तो जाएं कहां ? यहां बताते चलें कि फिलहाल सबसे ज्यादा परेशानी छोटे-छोटे ठेला खोमचा वालों पर पड़ा हुआ है।हालात यह है की जिनकी जिनकी दुकान है 4:00 बजे संध्या के बाद चलनी शुरू होती है उनके बीच 7:00 बजे के पूर्व से हीं अफरा तफरी का माहौल कायम हो जा रहा है।उनके द्वारा बेचने के लिए बनाई गई सामग्री अधिकांश रूप से वैसे ही रह जा रही है।अफरा तफरी माहौल के बीच व प्रशासनिक भय के कारण अपनी अपनी दुकान उठाकर छोटे छोटे दुकानदार घर चले जा रहे हैं।

हालात यह है कि यहां 7:00 बजे के बाद बाजारों में सन्नाटा पसर जा रहा है।प्रशासन की गाड़ियां सड़कों पर सरपट दौड़ रही है।सुबह से लेकर शाम तक जिले के विभिन्न बाजारों में सिर्फ कोरोना संक्रमण को लेकर चर्चाएं होते होते शाम हो जा रही है।गरीब तबके के आम जनमानस में दहशत का माहौल जैसा नजारा देखने को मिल रहा है।बहरहाल चाहे जो हो फिलहाल उपरोक्त तथ्यों पर बिहार सरकार को गंभीरता से लेने की जरूरत है।उधर सिवान जंक्शन से प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्टेशन परिसर में भीख मांग कर गुजारा करने वाले भीखमंगो का आलम यह है कि वे स्टेशन परिसर से पलायन कर गांव की तरफ चल पड़े हैं।भीख मांग कर अपना जीवन गुजारने वाले लोगों का आसरा यह है कि कोई भी शख्स मुझे दो टुकड़े निवाला दे दे। वही हालात सिवान के सभी बस स्टैंड का है।सभी बस स्टैंड से गिद्ध पक्षी की तरह भीख मांग कर अपना जीवन यापन कर रहे भिखमंगे विलुप्त हो गए हैं। उधर लोगों के समक्ष यह विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है कि हम सभी अपना निवाला ढूंढते ढूंढते सुबह से लेकर शाम कर दे रहे हैं तब जाकर दो टुकड़े निवाला मुझे नसीब हो रहा है अब मैं अपने दरवाजे पर पहुंचे भिखमंगे का निवाला कैसे दे सकूं ?