दुनिया को रास्ता दिखाने वाला भारत अब विश्व गुरु नहीं रहा: जलपुरुष

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परवेज अख्तर/सिवान:
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्म भूमि सारण जिले के सिताब दियारा गांव से 30 जनवरी को शुरू हुए भारत पुनर्निर्माण अभियान के तत्वाधान में बिहार संवाद यात्रा पर निकले जाने-माने पर्यावरणविद् एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह शनिवार की रात्रि सिवान पहुंचे। स्टेशन रोड स्थित विध्यवासनि सदन में रविवार की सुबह जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह को जितेंद्र स्वामी ने शॉल देकर सम्मानित किया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा में जगह-जगह खुली चर्चा होगी। हमें यह समझना है कि प्रकृति सभी की जरूरतों को पूरा करती है लेकिन वह एक भी व्यक्ति की लालच को पूरा नहीं कर सकती। बढ़ती बाढ़, सुखाड़ की आपदा से बचने के लिए यह आवश्यक है कि सभी प्राकृतिक सहवरण करें, प्रकृति के बारे में सोचें।

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हम सभी जानते हैं कि हम लोग सही रास्ते पर नहीं हैं दुनिया को रास्ता दिखाने वाला भारत अब विश्व गुरु नहीं रहा, लेकिन भारत पुन: विश्व गुरु बन सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा भारत की आस्था में निहित थी लेकिन उस आस्था को भारत भूल गया इसलिए भारत दुनिया का विश्व गुरु नहीं रहा। भारतीय ज्ञान तंत्र को दोबारा पुनर्जीवित करने के बाद भारत पुन: विश्व गुरु बन सकता है। बिहार संवाद यात्रा के संयोजक मनोहर मानव ने बताया कि वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को केंद्र में रखकर जलवायु परिवर्तन, अहिसा की ताकत, श्रम केंद्रित समाज निर्माण, लोक-शासन की संकल्पना, गरीबी उन्मूलन, किसान के जमीन और आजीविका की सुरक्षा, समतामूलक समाज और पर्यावरण तथा स्वास्थ्य परक मानवता का निर्माण करना है।

इसके पूर्व जीरादेई कार्यक्रम में भाग लेने के पहले सभी यात्रियों ने रेनुआ गांव स्थित पूर्व सांसद स्वर्गीय उमाशंकर सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया। उन्होंने बताया कि गांधी पखवारा में चलने वाली यह यात्रा सिताबदियारा से शुरू होकर सिवान, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, पटना, औरंगाबाद, जहानाबाद, बोधगया होते हुए प्राचीन ज्ञानस्थली नालंदा तक जाएगी।