करवा चौथ: पटना में चांद के दीदार के वक्त कैसा रहेगा मौसम, कब होगा चंद्रोदय?

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पटना: अपनी सुहाग की कामना से सुहागन महिलाएं आज बुधवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत करेंगी। सुहागन महिलाओं को करवा चौथ का व्रत करने से अखंड सौभाग्य का आशीष मिलता है। सुहागन महिलाएं व्रत व उपवास कर पति के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु की कामना करती है।

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करवाचौथ पर नवविवाहित महिलाओं में खासा उत्साह

करवाचौथ पर नवविवाहित महिलाओं में खासा उत्साह है। महिलाओं ने मंगलवार को जमकर खरीदारी की है

पटना, दरभंगा समेत कई शहरों में महिलाएं जमकर कर रहीं खरीदारी

करवाचौथ पर पटना, दरभंगा, समस्तीपुर समेत कई शहरों में महिलाएं जमकर खरीदारी कर रही हैं।

करवाचौथ पर पूरे सौ साल बाद बन रहा शुभ योग

इस बार करवाचौथ पर पूरे सौ साल के बाद बुधादित्य योग बन रहा है। यानी करवाचौथ के दिन बुध और मंगल एक साथ विराजमान रहेंगे।

पटना में शाम के 8 बजकर 10 मिनट पर चंद्रोदय

पंचांग के अनुसार बुधवार को करवा चौथ के दिन पटना में शाम के 8 बजकर 10 मिनट पर चंद्रोदय का समय है। आकाश बिल्कुल साफ रहेगा।

चांद के दीदार के वक्त पटना में कैसा रहेगा मौसम

Accuweather वेबसाइट के मुताबिक एक नवंबर को जब शाम में सुहागन महिलाएं चांद का दीदार करेंगी तब उस समय मौसम बिल्कुल साफ रहने का पूर्वानुमान है।

पूजा की थाली ऐसे सजाएं

पूजा की थाली में धूप, चंदन, रोली, घी, सिंदूर, फूल और माला आदि रखें। दीपक बड़े साइज का हो तो और भी अच्छा है। महिलाओं को चांद देखने के एक घंटा पू्र्व पूजा शुरू कर देनी चाहिए।

शिव और पार्वती की पूजा

संध्या बेला में पट्टिका के स्थान पर एक चौकी रखें और उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर लगाएं। तस्वीर के सामने बैठकर विधिवत शिवऔर पार्वती की पूजा करें। आरती के साथ पूजा का समापन करें। अंत में चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति के हाथों जल पीकर व्रत का पारण करें।

करवा चौथ मनाने की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवा नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित एक गांव में रहती थीं। उनके पति बुढ़े और निर्बल थे। एक दिन नदी के किनारे स्नान के दौरान मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। वह करवा कहकर अपनी पत्नी को पुकारने लगे। पति की पुकार सुन करवा वहां पहुंचीं। करवा के पतिव्रता धर्म का पालन करने से उनके सतीत्व में काफी शक्ति थी। करवा ने अपने पति के प्राण संकट में देख यमराज से प्रार्थना की। करवा के पतिव्रता होने के कारण यमराज ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और पूछा कि हे देवी आप क्या चाहती हैं।

इस पर करवा ने कहा कि मेरे पति के प्राण उस मगरमच्छ के कारण संकट में पड़े हैं। आप उसे मृत्यु दंड दे दीजिए। इसपर यमराज ने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी शेष बची है। तब करवा ने कहा कि यदि आपने उस मगरमच्छ को मृत्यु दंड नहीं दिया, तो मैं अपने तपोबल से आपको श्राप दे दूंगी। उसका साहस देख यमराज भी डर गए और मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया। साथ ही करवा के पति को दीर्घायु होने का वरदान दिया। उसी समय से करवा चौथ व्रत प्रचलन में आया।