सिवान के मैरवा में दांपत्य बंधन समारोह के लिए तैयार विवाह भवन

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परवेज़ अख्तर/सिवान: मैरवा रेलवे स्टेशन से उत्तर स्थित चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर के पास स्थित जिला परिषद का विवाह भवन शादी समारोह का गवाह बनने के लिए तैयार हो गया है। यह कम बजट में उपलब्ध हो सकेगा। पहले मैरिज हॉल के लिए वर वधु पक्ष को मैरवा के मैरेज हाल बुक करने पर 50 हजार से एक लाख तक खर्च करने पड़ते थे। जिला परिषद के इस विवाह भवन के बन जाने से लोगों की जेब पर बोझ कम होगा। वर्षों से स्थानीय लोगों को इस मैरिज हॉल के बनने की प्रतीक्षा थी। शनिवार को इसका उद्घाटन फीता काटकर जिला परिषद अध्यक्ष संगीता देवी ने किया।

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जिला परिषद के निरीक्षण भवन कैंपस में इस विवाह भवन निर्माण पर 43 लाख खर्च:

विवाह भवन का निर्माण 42.5 लाख की लागत से कराया गया है। जिला परिषद मद से बनाए गए इस विवाह भवन का लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। निर्माण के शुरू में कई तरह की अड़चने उत्पन्न हुई। इसके कारण इसके निर्माण में काफी समय लगा। बता दें कि यहां पहले अंग्रेजों के जमाने का निर्मित आईबी था। बाद में जिला परिषद की भूमि को अतिक्रमण कर लिया गया था। जब इस पर जिला परिषद की नजर पड़ी तो पहले अतिक्रमण हटाया गया और विवाह भवन निर्माण की योजना बनी उसके बाद भूमि की घेराबंदी की गई।

परिसर बनेगा सुंदर और आकर्षक :

इस भवन के बाहरी परिसर में चारदीवारी व गेट का निर्माण कार्य भी पंचम राज्य वित्त आयोग की राशि से 18.26 लाख खर्च गया है। इस विवाह भवन परिसर को सुंदर और आकर्षक बनाने का काम चल रहा है। इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

जिप अध्यक्ष ने किया निरीक्षण :

विवाह भवन का उद्घाटन करने पहुंची जिला परिषद अध्यक्ष ने परिसर में चल रहे सुंदरीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उनके साथ जिला परिषद के सहायक अभियंता सुरेश चौधरी, जिला परिषद सदस्य ललन यादव, समरजीत संह, सुशीला देवी, नीरज कुमार, सुशील कुमार डब्ल्यू, हितेश कुमार, राजेश यादव, मनोज कुमार थे।

चंदनिया डीह बने पर्यटक स्थल :

जिला परिषद अध्यक्ष समेत उपस्थित जिला पार्षदों ने कहा कि राज्य सरकार से चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर को पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग बहुत पहले से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का है। पर्यटक स्थल के रूप में इसे विकसित करने से इस क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि इस मंदिर के गौरवशाली पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्वरूप को देखते हुए इसे बहुत पहले ही पर्यटक स्थल घोषित हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक इस पर सरकार का ध्यान नहीं गया है।