मुरादें मांगने में गुजरी शब-ए-बरात की रात

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परवेज़ अख्तर/​सिवान :- जिला मुख्यालय समेत विभिन्न प्रखंडों में मंगलवार की रात मुस्लिम भाइयों में शब-ए-बरात को लेकर काफी उत्साह देखा गया। इस्लामी साल का आठवां महीना शाबान की 15वीं रात में खामोश बस्तियां गुलजार हो उठीं। बरसों से कब्र में दफन अपने पूर्वजों के लिए फातेहा पढ़ बख्शीश की दुआ अल्लाह से मांगी गई। इसके लिए रात भर कब्रिस्तान में लोगों का आना जाना लगा रहा। अगरबत्तियों की खुशबू से फिजा सराबोर हो उठी। सड़कों पर बच्चे अल्लाहो अकबर के नारे बुलंद कर रात इबादत में जागने का सबूत दिया। कब्रिस्तान और मस्जिदों में रोशनी का विशेष प्रबंध किया गया था। इसे आकर्षक तरीके से सजाया-संवारा गया था। पूरी रात मस्जिदें इबादत गुजारों से भरी रहीं। कुरान शरीफ की तिलावत, फर्ज, सुन्नत और नफील नमाजे अदाकर खैर एवं बरकत की दुआएं की गई। गुनाहों से तौबा कर इससे बचने और पूर्व की गलतियों की माफी मांगी गई। मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक में स्थान मिलने की ईश्वर से कामना की गई। शब-ए-बरात के महत्व को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के बच्चे, जवान, बूढ़े सभी सूर्यास्त होते ही मस्जिदों मे जाकर अल्लाह की इबादत मे मशगूल हो गए। कई मस्जिदों में उल्लमाओं ने अपनी नूरानी तकरीर से अल्लाह के हुक्म और रसूलुल्लाह के बताए रास्ते पर चलने की ताकीद की। मैरवा के मिस्करही मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद शमीम ने तकरीर करते हुए कहा कि शब-ए-बरात बख्शीश की रात है। इस रात को अल्लाह तआला अपने बंदों की हर नेक दुआ पूरी करते हैं। अगले एक साल की रिज्क इसी महीने तक्सीम की जाती है। अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत के तीन सौ दरवाजे खोल देते हैं। यह रात तमाम रातों से अफजल है। हदीस शरीफ में है कि इबादतगुजार बंदे की हर मुरादें अल्लाह शब-ए-बरात में पूरी करते हैं। इसलिए इस खास अवसर को गंवाने वाला बद किस्मत ही हो सकता है। जिला मुख्यालय के कागजी मोहल्ला, नवलपुर, नई किला, मखदुम सराय, एमएम कॉलोनी, महादेवा, हकाम, बिंदुसार-हामिद, रामपुर, ओरमा, चकिया, फतेहपुर, पकड़ी बंगाली समेत अन्य जगहों के कब्रिस्तानों एवं मजारों पर मुस्लिम भाइयों ने नमाज अदा कर दुआएं मांगी। इसके अलावा मैरवा प्रखंड के लालगंज, मिस्करही, मोतीछापर, बैकुंठछापर, बड़गांव, कैथवली, बभनौली, परसिया, नवादा, बड़गांव, करजनिया, इंग्लिश, कोल्हुआ, दरगाह, डोमडीह, हरपुर, बरासो, सेमरा, लेभरी खैरा समेत विभिन्न गांव में स्थित कब्रिस्तान में जाकर लोगों ने अपने पूर्वजों को याद किया और उनकी मुक्ति के लिए प्रार्थना की। अपने गांव में स्थित मस्जिदों में इबादत की। वहीं बड़हरिया, लौवान, कुड़वा, ईदगाह, लकड़ी दरगाहर, मुर्गिया टोला, गोरेयाकोठी, शेखपुरा, महम्मदपुर, दुधरा, नबीगंज, लखनौरा, मदारपुर,vबसंतपुर, खवासपुर, शेखपुरा, शहरकोला, भगवानपुर, चौरासी, ब्रह्मस्थान, मोरा मैरी, सरेयां, हसनपुरा, शेखपुरा, अरंडा, उसरी, गायघाट, लहेजी, रजनपुरा पियाउर, महाराजगंज, तक्कीपुर, दारौंदा, रुकुंदीपुर, हुसैनगंज, बड़रम, सुरापुर, फरीदपुर, सिसवन, तरवारा, डी के सारंग पुर, पचरुखी, चौकी हसन, फखरुद्दीनपुर, सिसवन, रघुनाथपुर, आंदर, दरौली, जीरादेई, जामापुर, चांदपाली आदि गांवों में कब्रिस्तान तथा मजारों पर मुस्लिम भाइयों ने पूरी रात दुआएं मांगी।

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