सिवान: डीएपी की किल्लत और कालाबाजारी किसानों पर भारी

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kishan
  • किसान नेता ने कहा कि डीएपी की किल्लत के आड़ में डीएपी की हो रही कालाबाजारी को जिला कृषि पदाधिकारी को अविलंब रोकना चाहिए
  • कृषि विभाग के निर्देशों का भी नहीं किया जा रहा है पालन
  • एनपीके और पोटाश भी सरकारी दर पर ही मिलना चाहिए
  • 02 सौ 50 से 4 सौ तक किसानों से लिया जा रहा अधिक
  • 03 हजार 500 एमटी डीएपी-एनपीके उपलब्ध है जिले में

परवेज अख्तर/सिवान: तमाम सख्तियों और सरकारी निर्देशों के बावजूद जिले के किसानों को निर्धारित दर पर डीएपी-एनपीके खाद नहीं मिल रही है। जबकि डीएपी व एनपीके की कमी धीरे-धीरे दूर हो रही है। डीएपी की किल्लत के नाम पर डीएपी और एनपीके की कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग की तमाम दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए दुकानदार डीएपी पर सरकार द्वारा निर्धारित दर से प्रति बोरी 250 रुपये से 400 रुपये तक अधिक ले रहे हैं। फुलवरिया गांव के किसान संतोष सिंह ने बताया कि उन्हें ही एक दुकानदार को एक बोरी डीएपी के लिए 1750 रुपये भुगतान करना पड़ा। जब इसकी शिकायत इधर-उधर उन्होंने की तो उसने 400 रुपये मुझे वापस कर दिया। किसान नेता रत्नेश्वर सिंह ने कहा कि सरकार डीएपी की कीमत 1250 रुपये तक अधिकतम निर्धारित की है। इसके बावजूद किसानों से 400 रुपये तक अधिक लिया जा रहा है। एनपीके लेने पर भी किसानों को निर्धारित दर से 250 रुपये अधिक देने पड़ रहे हैं। किसान नेता ने कहा कि डीएपी की किल्लत के आड़ में डीएपी की हो रही कालाबाजारी को जिला कृषि पदाधिकारी को अविलंब रोकना चाहिए। कहा कि यूरिया की तरह डीएपी, एनपीके और पोटाश भी सरकारी दर पर ही किसानों को मिलना चाहिए। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसानों साक्ष्य के साथ लिखित रूप से शिकायत करनी चाहिए। इस मामले में जो भी दुकानदार दोषी पाया जाएगा उनपर हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।

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डीएपी की उपलब्धता बढ़ने से गेहूं की बुआई में तेजी

जिले में डीएपी-एनपीके की उपलब्धता बढ़ने से गेहूं की बुआई में तेजी आ गयी है। डीएपी और एनपीके की अधिक कीमत चुकाकर भी किसान जल्द से जल्द गेहूं की बुआई कर लेना चाह रहे हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं की बुआई 30 नवंबर तक हो जाना चाहिए। फिर भी 15 दिसंबर तक भी बुआई हो जाए तो उचित ही कहा जाएगा। इसके बाद बुआई करने पर गेहूं के पैदावार पर असर पड़ेगा। बुधवार को गेहूं की बुआई करा रहे किसान बलिन्द्र प्रसाद और देवराज राम ने कहा कि 15-20 दिन से तो डीएपी के लिए इस दुकान से उस दुकान तक दौड़ लगा रहे थे। फिर उन्हें डीएपी उपलब्ध नहीं हो पाया। बाजार में अब डीएपी और एनपीके उपलब्ध हुआ है तो अधिक कीमत लिया जा रहा है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर खरीदना पड़ा। अगर नहीं खरीदते तो यह भी खत्म हो जाता तो काफी परेशानी होती। बहरहाल, दो दिनों में जिले में डीएपी-एनपीके का स्टॉक बढ़कर 3 हजार 500 एमटी हो गया है। इससे गेहूं की बुआई में भी तेजी आ गयी। अनुमान किया जा रहा है कि 35 से 40 फीसदी तक गेहूं की बुआई का काम अबतक पूरा कर लिया गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला कृषि पदाधिकारी जयराम पाल ने कहा कि डीएपी-एनपीके का कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसान साक्ष्य के साथ लिखित रूप से हमें शिकायत करें। फिल्हाल जिले में 3 हजार 500 एमटी डीएपी उपलब्ध है। दो-तीन दिनों में सीवान में भी डीएपी का रेक लगना है। इसके बाद डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता हो जाएगी। 40 फीसदी तक गेहूं की और अन्य रबी फसल की बुआई लगभग पूरी ही हो चुकी है।

तितरा में 12 सौ में किसानों को मिला खाद

मैरवा के तितरा पैक्स से बुधवार को किसानों को 12 सौ रुपए बोरी के हिसाब से खाद दिया गया। मंगलवार की रात खाद बांटने की जानकारी किसानों को दे दी गई थी। परिणाम हुआ कि सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लग गई। पैक्स अध्यक्ष राजीव कुमार सिंह उर्फ पिंकू राय ने बताया कि जरुरत के हिसाब से सभी किसानों को डीएपी दिया गया। खाद लेकर किसान काफी खुश थे।