ग्लोबल आयोडिन अल्पता बचाव सप्ताह पर कार्यशाला का हुआ आयोजन

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  • सिविल सर्जन ने किया उद्घाटन
  • जिले में 96.2 प्रतिशत लोग आयोडिन युक्त नमक का करते है उपयोग
  • आयोडिनयुक्त नमक के प्रयोग से कई बिमारी से बचाव संभव

सिवान:- सदर अस्पताल परिसर में सोमवार को ग्लोबल आयोडीन अल्पता बचाव दिवस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. आशेष कुमार, एनसीडीओ डॉ. जयश्री प्रसाद, जिला प्रतिरक्षण डॉ. प्रमोद कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन ने कहा कि आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवजात शिशु में जन्मजात विसंगतियां व अविकसित मस्तिष्क जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। केवल उचित नमक के दैनिक प्रयोग मात्र से उक्त समस्याओं से बचा जा सकता है। घेंघा, मंद मानसिक व शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता में कमी आदि रोगों से बचाव हेतु आयोडीन युक्त नमक के प्रयोग पर जोर दिया गया। आयोडीन की कमी से बच्चों में बुद्धिमत्ता की कमी, बौनापन, अंधापन, बहरापन, घेघा गर्भावस्था के दौरान अचानक गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म, गर्भ में बच्चे के मानसिक विकास में कमी, किशोरावस्था में बढ़त रूक जाती है। महिलाओं में बांझपन आ सकता है। बीमारियों से बचाव हेतु आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया। इस अवसर पर एनसीडी क्लीनिक के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार, अस्पताल प्रबंधक समेत अन्य चिकित्साकर्मी मौजूद थे।

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सभी प्रखंडो चलाया जा रहा है जागरूकता अभियान

एनसीडीओ डॉ जयश्री प्रसाद ने बताया कि जिले में 21 अक्टूबर से ग्लोबल आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह मनाया जा रहा है। इसको लेकर जिला से लेकर प्रखंड स्तर बैनर पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, हेल्थ एंड वेलनेस सेन्टर के पदाधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। global aayodin

96.2 प्रतिशत लोग करते है आयोडिन युक्त नमक का प्रयोग

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 वर्ष 2015-16 के अनुसार सिवान जिले में कुल 96.2 प्रतिशत लोग आयोडिनयुक्त नमक का प्रयोग करते हैं। वहीं बिहार में 93.6 प्रतिशत लोग आयोडिन युक्त नमक का प्रयोग करते हैं।

क्या है लक्षण : गर्भवती महिलाओं में आयोडिन की कमी से गर्भपात, नवजात शिशुओं का वजन कम होना, शिशु का मृत पैदा होना आदि लक्षण होते हैं। आयोडिन हमारे शरीर के तापमान को भी नियमित करने में मदद करता है, जिससे सर्दी-गर्मी को हमारा शरीर सह पाता है। कई आयोडिन की कमी के लक्षण स्पष्ट नहीं हो पाते हैं। इसके लिए यूरिन या ब्लड टेस्ट करवाना ठीक रहता है, जिससे आयोडिन के लेवल को आसानी से चेक किया जा सकता है।

इन्हें खाने में करें शामिल

  • भुने हुए आलू में लगभग 40 प्रतिशत आयोडिन पाया जाता है।
  • एक कप दूध में लगभग 56 माइक्रोग्राम आयोडिन पाया जाता है, साथ ही इसमें कैल्शियम और विटामिन-डी भी मिलता है।
  • रोज तीन मुन्नके खाने से 34 माइक्रोग्राम आयोडिन आपके शरीर में जाता है।
  • दही में लगभग 80 माइक्रोग्राम आयोडिन होता है, जो दिनभर की कमी को पूरा करता है।
  • सी-फूड आयोडीन का बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसलिए भोजन में इसे शामिल करें। इसके साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन से मस्तिष्क की नयी कोशिकाओं का निर्माण होता है।