छपरा : टीबी उन्मूलन को जन-आदोलन बनाने में सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण

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  • जूम एप के माध्यम से अन्तर्विभागीय बैठक आयोजित
  • जन-आंदोलन में पंचायती राज के प्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी
  • गांव व पंचायत स्तर पर चलेगा जागरूकता अभियान
  • टीबी के इलाज में मरीजों का एक भी रुपया खर्च नहीं होना चाहिए

छपरा : टीबी उन्मूलन के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जन-आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया है। जन-आंदोलन अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर राज्यस्तरीय ऑनलाइन अन्तर्विभागीय बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जन-आंदोलन को सफल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। ऑनालाइन मीटिंग का शुभारंभ करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. कुमार गौरव ने कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान को जन् आंदोलन का रूप देने में सामुदायिक सहभागिता अति आवश्यक है। इस अभियान में अन्तर्विभागीय समन्वय स्थापित कर कार्य करने की जरूरत है। पंचायती राज के प्रतिनिधियों का सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि टीबी के इलाज में किसी भी मरीज का एक भी रुपये खर्च नहीं होना चाहिए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वेनरेबल ग्रुप् में टीबी मरीजों की खोज करें। जहां पर टीबी के मरीज ज्यादा हैं वैसे गांवों को चिह्नित कर ज्यादा से ज्यादा जांच करें और कंटेक्ट ट्रेसिंग करना भी बेहद जरूरी है। टीबी के मरीजों की जितनी जल्दी पहचान होगी इलाज करना आसान होगा। आरोग्य दिवस पर बैठक कर आमलोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। टीबी के मरीजों को उनको मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी देना है। इस ऑनलाइन मीटिंग में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी,विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. ब्रिजेन्द्र सौरभ, केयर इंडिया के डॉ. सुनील कुमार, पीएफएमस कंसल्टेंट दीपक कुमार, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, केयर इंडिया के प्रतिनिधि शामिल थे।

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केयर इंडिया की टीम प्रखंड स्तर पर करेगी सहयोग:

केयर इंडिया के डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि जन-आंदोलन में केयर इंडिया की टीम प्रखंड स्तर पर सहयोग करेगी। सामुदायिक गतिविधियों में सहयोग प्रदान किया जायेगा। इसको लेकर माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके तहत टीबी पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीटिंग के माध्यम से जनप्रतिनिधि, धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों, टीबी चैंपियन, ट्रीटमेंट सपोर्टर, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के बीच राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं, निक्षय पोषण योजना आदि विषय पर व्यापक जानकारी दी जाएगी ।

गरीब परिवार व कुपोषित व्यक्तियों में टीबी होने की अधिक संभावना :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. कुमार गौरव ने कहा कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इसके खिलाफ हमें लड़ाई लड़ने की जरूरत है। अक्सर यह देखा जाता है कि टीबी गरीब परिवार लोगों या कुपोषित व्यक्तियों या बच्चों में होता है, क्योंकि अगर कोई एक व्यक्ति टीबी से ग्रसित हो गया तो वे सभी लोग एक छोटी झोपड़ी में रहते हैं जिस कारण एक दूसरे में टीबी फैल जाता है। टीबी फैलने के मुख्य कारण हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना। इसके बाद अत्यधिक भीड़, कच्चे मकान, घर के अंदर प्रदूषित हवा, प्रवासी, डायबिटीज, एचआईवी, धूम्रपान भी टीबी के कारण होते हैं। टीबी मुक्त करने के लिए सक्रिय रोगियों की खोज, निजी चिकित्सकों की सहभागिता, मल्टीसेक्टरल रेस्पांस, टीबी की दवाओं के साथ वैसे समुदाय के बीच भी पहुंच बनानी होगी, जहां अभी तक लोगों का ध्यान नहीं जा पाया है।

टीबी के मरीजों व ट्रीटमेंट सपोर्टर को प्रोत्साहन राशि:

पीएफएमएस के कंसल्टेंट दीपक कुमार ने बताया कि टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से प्रति माह 500 रुपये की पोषाहार की राशि दी जाती है। वहीं टीबी मरीजों के नोटीफाइड करने पर निजी चिकित्सकों को 500रु. तथा उस मरीज को पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद भी निजी चिकित्सकों को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं ट्रीटमेंट सपोर्टर को अगर कोई टीबी के मरीज छह माह में ठीक हो गया तो 1000 रुपये तथा एमडीआर के मरीज के ठीक होने पर 5000 रुपये की प्रोत्साहन दी जाती है। वहीं अगर कोई आम व्यक्ति भी किसी मरीज को सरकारी अस्पताल में लेकर आता है और उस व्यक्ति में टीबी की पुष्टि होती है तो लाने वाले व्यक्ति को 500 रुपये देने का प्रावधान है।