छपरा: कृमि से बचाव के लिए बच्चों को खिलायी गयी अल्बेंडाजोल की दवा, 23,70,177 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य

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  • जो बच्चे छूट गए, उन्हें 26 अप्रैल को मॉपअप राउंड के दौरान खिलाई जाएगी दवा
  • शिक्षकों की मौजूदगी में बच्चों का दवा का कराया गया सेवन
  • कृमि संक्रमण बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधक

छपरा: राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर शुक्रवार को एक से 19 साल के बच्चों, किशोरों और युवाओं को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। शुक्रवार को जिले में अभियान की शुरुआत हुई। सिविल सर्जन डॉ. सागर दुलाल सिन्हा ने बच्चे को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत की । सिविल सर्जन ने बताया कि एक से 19 साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी।

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दो साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की आधी गोली खिलाई जाएगी और उससे अधिक उम्र के लोगों को पूरी गोली खिलाई जाएगी। यह अभियान आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में चल रहा है। अल्बेंडाजोल की दवा बच्चों को चबाकर खानी है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इस दवा का कोई साइडइफेक्ट नहीं है। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि जिसके घर में 19 साल से कम उम्र के बच्चे हैं, वह अल्बेंडाजोल की दवा जरूर खिलाएं। आज जो बच्चे छूट जाएंगे, उनके लिए 26 अप्रैल को मॉपअप राउंड चलाया जाएगा। उस दिन याद से बच्चे को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाना नहीं भूलिएगा। जिले में 23,70,177 लाख बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

पेट से संबंधित बीमारियों से बच्चों का बचाव है उद्देश्यः

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. चंदेश्वर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर बच्चों को दवा खिलाने का मुख्य उद्देश्य पेट से संबंधित बीमारियों से उसका बचाव करना है। आज अभियान की शुरुआत हुई है। जो बच्चे आज छूट जाएंगे, उन्हें 26 को मॉपअप राउंड के दिन दवा खिलाई जाएगी। बच्चों को उम्र के अनुसार खुराक दी जा रही है। इसे लेकर व्यापक तैयारी की गई है। हमलोगों को उम्मीद है कि इसे लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे पूरा कर लेंगे। सभी बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाने में कामयाब रहेंगे।

स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता है कोई प्रतिकूल प्रभावः

डीआईओ ने बताया कि कृमि के कारण बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। राष्ट्रीय कृमि दिवस के अवसर पर जिले के 01 से 19 साल तक के सभी बच्चों के लिये कृमिनाशक दवा का सेवन जरूरी है। इसके सेवन से बच्चे पेट के कई रोग, कुपोषण सहित अन्य बीमारियों से सुरक्षित होते हैं। निर्धारित समय पर कृमिनाशक दवा का सेवन जरूरी है। इससे शरीर के अंदर पल रहे कृमि नष्ट हो जाते हैं। बच्चों को दवा खिलाने के लिए जिले की चयनित आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया है। कृमि की दवा खाने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह शरीर को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। बीमार बच्चों को दवा का सेवन नहीं कराया जाना है।

उम्र के अनुपात में कराया जायेगा दवा का सेवन:

  • 1 से 2 वर्ष के बच्चे- आधी गोली को चूरकर स्वच्छ पानी में मिलकर चम्मच से पिलाना
  • 2 से 6 वर्ष तक के बच्चे- एक पूरी गोली चूरकर पानी के साथ
  • 6 से 19 वर्ष तक के बच्चे- पूरी एक गोली चबाकर पानी के साथ।

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