बच्चों के खिले चेहरे, जब डीपीओ ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ

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परवेज अख्तर/सीवान-: सरकारी स्कूलों में औचक निरिक्षण का काम लगातार जारी है। निदेशक प्राथमिक शिक्षा बिहार, पटना के निर्देश पर जिले के कुल 18 चिह्नित प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का निरीक्षण पत्रांकित पदाधिकारियों द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने मंगलवार की देर रात एक पत्र जारी कर राज्य के तकरीबन 470 स्कूलों के औचक निरीक्षण के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। संबंधित आदेश के आलोक में मध्य विद्यालय श्यामपुर-भंटापोखर का निरीक्षण डीपीओ स्थापना अमरेन्द्र कुमार मिश्र ने किया। जिसमें चेतना सत्र, प्रार्थना साफ-सफाई, शिक्षक-छात्र उपस्थिति से लेकर मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता तक की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक निशिकांत श्रीवास्तव की उपस्थिति में सुबह 9:00 बजे तक कुल 17 पदस्थापित शिक्षकों में 16 शिक्षक उपस्थित पाए गए। जिसमें एक शिक्षक आकस्मिक अवकाश में थे। ससमय विद्यालय की साफ-सफाई की जा रही थी। तत्पश्चात प्रार्थना के लिए घंटी बजी। जिसमें पीटी से चेतना-सत्र का शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात बच्चों ने सर्वधर्म प्रार्थना व बिहार राज्य प्रार्थना की प्रस्तुति प्रभावी ढंग से की। पूर्वाह्न 9: 45 बजे वर्ग संचालित हेतु घंटी बजी। वर्गों का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। तत्पश्चात डीपीओ सीधे सातवीं कक्षा में जा घुसे। उन्होंने सवाल किया- त्रिभुज के तीनों को कोणों का योगफल कितना होता है? बच्चों ने इसका सही जवाब दिया। इसके बाद डीपीओ ने कई सवाल पूछे, जो बच्चों ने आसानी से बता दिए। राइटिंग परखने के लिए ब्लैक बोर्ड पर खुद भी लिखा और बच्चों से लिखवाया। इसके बाद वे बालिकाओं की कक्षा आठ में गए और बच्चियों से तरह-तरह के सवाल किए। किताब उठाकर खुद भी पढ़ाया। छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन स्वच्छ रहने, शौचालय की सफाई, घर के बड़े सदस्यों के पैर छूने सहित दैनिक क्रियाओं के बारे में पूछा। उनके द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा व अनुशासन पर विशेष फोकस किया गया। उन्होंने बताया कि सेवा, संस्कार व अनुशासन हमें सभी विद्याओं में निपुण कर देशभक्त और महान नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता, विद्यालय, जिला व राज्य का नाम रोशन करने को कहा। बारी-बारी से उनके द्वारा विभिन्न कक्षाओं का अवलोकन किया गया। उनके पढ़ाने की अभिनव तकनीक व प्रेरणा से बच्चें व शिक्षक सभी प्रभावित हुए। विद्यालय में नामांकन 461 के विरुद्ध सिर्फ 301 बच्चें उपस्थित पाए गए। दैनिक मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता उत्तम पाया गया। किचेन व चापाकल के पास साफ-सफाई की स्थिति बेहतर देखने को मिला।

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