राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की सिविल सर्जन ने किया समीक्षा

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  • बच्चों की स्क्रीनिंग कर डीईआईसी सेंटर में रेफर करने का दिया निर्देश
  • सभी ब्लॉक से प्रतिमाह 5 सर्जरी कराने के लिए बच्चों को चिन्हित करें

छपरा: जिला स्वास्थ समिति के सभागार में सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा बैठक की गई। जिसमें सिविल सर्जन ने आरबीएसके के नोडल पदाधिकारी और सभी ब्लॉक टीम को निर्देश दिया कि स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्क्रीनिंग किए गए बच्चों में डिफेक्ट एट बर्थ से ग्रसित जैसे- न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, क्लब फुट, क्लेफ्ट एंड प्लेट, सीएचडी इत्यादि बच्चों को डीईआईसी सेंटर सदर अस्पताल छपरा में भेजना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही सिविल सर्जन ने यह निर्देश दिया कि सभी ब्लॉक प्रत्येक माह 5 सर्जरी कराने के लिए बच्चों को रेफर करना सुनिश्चित करेंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसे लाभान्वित हो सके। सीएस डॉ माधवेश्वर झा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में विशिष्ट रोग सहित 4डी परेशानियों के लिए शीघ्र पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप करना है। इन चार परेशानियों में जन्म के समय जन्म दोष बीमारी, कमी और विकलांगता सहित विकास में रुकावट की जांच शामिल है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जन्म से लेकर 6 वर्ष की आयु वर्ग के लिए प्रबंधन विशेषकर जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र पर किया जाता है। जबकि 6 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के लिए स्थितियों का प्रबंधन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से किया जाता है। डीईआईसी दोनों आयु वर्ग के लिए रेफरल लिंक के रूप में भी कार्य करता है।

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आरबीएस के टीम क्षेत्र भ्रमण कर करती है बच्चों की पहचान

सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों का टीम के द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके माध्यम से बच्चों की गंभीर बीमारियों की पूरी जानकारी ली जाती है। इसके बाद बच्चों के परिजनों से टीम के चिकित्सक वार्ता कर उच्च सुविधा युक्त चिकित्सालय में निशुल्क उपचार की व्यवस्था करवाते हैं।

38 प्रकार की बीमारियों का समुचित इलाज

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत बच्चों में 38 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4 डी का नाम दिया गया है। जिन 38 बीमारियों का इलाज किया जाता है। हृदयरोग, दंत क्षय,  ऐंठन विकार, न्यूरल ट्यूब की खराबी, डाउनसिंड्रोम, फटा होठ एवं तालू/सिर्फ़ फटा तालू,  मुद्गरपाद (अंदर की ओर मुड़ी हुई पैर की अंगुलियां), असामान्य आकार का कुल्हा, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदयरोग,  असामयिक दृष्टिपटल विकार आदि शामिल है। बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद कुमार , जिला योजना समन्वयक रमेश चन्द्र कुमार , जिला समन्वयक आरबीएसके डॉ अमरेन्द्र कुमार सिंह समेत सभी प्रखंडो के नोडल पदाधिकारी मैजूद थे।