जीरादेई में वायु प्रदूषण का खतरा :- प्रतिबंध के बावजूद किसान खेतों में जला रहे पराली

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परवेज़ अख्तर/सिवान:
जिले के जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के जामापुर, ठेपहां, चंदौली गंगोली, खड्गी रामपुर, मनिया, शिवपुर, तितरा समेत दर्जनों गांव में प्रतिबंध के बावजूद किसान खेतों में धान की पराली जलाते देखे जा रहे हैं। खेतों में पराली जलाने से जहां वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं भूमि की उपजाऊ क्षमता भी कम हो रही है। हालांकि प्रशासन ने पराली खेतों में नहीं जलाने को लेकर जागरुकता अभियान भी चला रखा है, इसके बावजूद किसान खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रशासन ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए खेतों में धान की पराली जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दी है। धान की कटाई के बाद सरसों और गेहूं की बुआई आरंभ हो जाती है। किसान इन फसलों की जल्द बुआई करने के लिए धान की कटाई का कार्य पूर्ण होने के बाद पराली में आग लगा देते हैं।

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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में पराली जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। वहीं मिट्टी में मौजूद किसान मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हें। इसका सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। किसान मित्र कीट नष्ट होने से फसलों में बीमारी का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। वहीं पराली के धुएं से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता है। इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी कुमार रामानुज ने बताया कि खेतों में पराली नहीं जलाने के लिए विभाग द्वारा जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को पराली का प्रयोग चारे के रूप में करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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