भगवानपुर हाट: भोजपुरी संस्कृति और साहित्य का अनूठा संगम का केंद्र रहा चौथा राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव

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परवेज अख्तर/सीवान: जिले के भगवानपुर हाट प्रखंड मुख्यालय के भगवानपुर महाविद्यालय परिसर में भोजपुरी भाषा आंदोलन को समर्पित चौथा राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव की शुरुआत 12 मार्च को हुई. रंग जुलूस में सामाजिक ताना-बाना को जोड़ने का काम किया और भोजपुरी भाषा आंदोलन में लोगों को जुड़ने के लिए प्रेरित किया. इसमें स्थानीय प्रतिनिधि सामाजिक कार्यकर्ता और भोजपुरी के अनेक सिपाही जो बिहार के अनेक जिलों से सम्मेलन में हिस्सा लिए. महोत्सव के दूसरे दिन भोजपुरी परंपरा और संस्कृति से सजी विभिन्न प्रकार के स्टॉल का उद्घाटन स्थानीय सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के द्वारा किया गया. लगभग 20 की संख्या में बनी इंस्टॉल में पुराने अनाज चीना, सवा, कोदो, माल टांगउन, मडुआ सहित दर्जनों अनाज लोगों के प्रदर्शन के लिए लगाए गए थे. वही पुराने कृषि संयंत्र, परिधान, मिट्टी के बर्तन, पुराने सिक्के, प्रकाश के लिए उपयोग किए जाने वाले बत्ती, घरेलू उपयोग की पुराने समान और खानपान में पुराने चीजों के स्टालों ने ग्रामीण परिवेश के युवा महिला और बच्चों को अपनी तरफ खूब आकर्षित किया. कुछ लोग इसे संस्कृति की धरोहर के रूप में सजोने की बात करते रहें, तो कुछ लोग इसे बच्चों के जानकारी का एक अच्छा साधन बता रहे थे. जबकि भोजपुरी भाषा और शब्द संरक्षण के दृष्टिकोण से ऐसे प्रदर्शनी को सराहते हुए कहा कि यह भाषा को समृद्ध और सशक्त करने के लिए एक उपयुक्त साधन है.

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मूर्तिकार जितेंद्र के द्वारा बनाए गए भिखारी ठाकुर की मूर्तियां और अन्य मूर्तियां मेला और प्रदर्शनी में मुख्य रूप से सेल्फी और फोटो लेने का जगह रहा वैसे तो सभी पुराने सामान का फोटो दर्शकों ने खूब अपने मोबाइल में बटोरा. मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए  सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए लोगों के बीच में लोकसभा में जोरदार ढंग से आवाज उठाने की बात कही जिससे लोगों ने पूरे जोश के साथ समर्थन किया. इस अवसर पर वार्षिक पत्रिका रंग रूप का चौथा अंक का लोकार्पण किया गया. पहले सत्र में लोकार्पित पत्रिका रंग रूप के विशेष अंक भोजपुरी प्रदेश के मेला पर समीक्षा प्रो. सूर्यदेव प्रसाद के अध्यक्षता में संपन्न हुआ. इस सत्र का संचालन प्रोफेसर अशोक प्रियंबद ने किया .भोजपुरी भाषा एवं साहित्य से भोजपुरी शब्दों के बिलईला पर गोष्ठी, भोजपुरी भाषा एवं साहित्य से भोजपुरी शब्दों के बिलईला के विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजित किया गया.जिसकी अध्यक्षता वीरेंद्र मिश्रा अभय तथा संचालन मूंगालाल शास्त्री ने किया. इस सत्र के मुख्य वक्ता श्री चंदेश्वर परवाना गोरखपुर ने भोजपुरी भाषा एवं साहित्य से विलुप्त हो रहे शब्दों पर गहरी चिंता व्यक्त की.समापन सत्र में के पहले कवि गोष्ठी में लोगों ने खूब ठहाके लगाए. समापन सत्र में पहुंच स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कवियों को सम्मानित किया. उन्होंने भिखारी ठाकुर की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार को सम्मानित करते हुए उसके कला की प्रशंसा की. इस अवसर पर महोत्सव के अध्यक्ष डॉ हरेंद्र सिंह, डॉ उमा शंकर साहू, कृष्ण मोहन सिंह, पूर्व विधायक माणिक चन्द राय, अब्दुल कादिर, अनिल गुप्ता, मुन्ना चौधरी, मनोज शर्मा, संजय शर्मा, नागमणि आदि मौजूद रहे.