गोपालगंज:- सब्जियां व दाल खरीदने में छूट रहे गरीबों के पसीने

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गोपालगंज में महंगाई ने बिगाड़ा घर का बजट

गोपालगंज: भोरे में इन दिनों सब्जियों व दालों के दाम आसमान छू रहे हैं।इन्हें खरीदने में गरीबों के पसीने छूट रहे हैं।इससे गरीब व मजदूर किस्म के लोग परेशान दिख रहे हैं।सब्जियों व दालों की कमरतोड़ महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी को भी महंगा बना दिया है।इसे लेकर लोग शासन-प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं।अब दाल रोटी खाएंगे,प्रभु का गुण गाएंगे वाली कहावत पुराने दिनों की बात हो गई है।सब्जियों व दालों की महंगाई का आलम यह है कि इन दिनों भोरे थाना क्षेत्र के तमाम बाजारों में गरीबों का सहारा कहलाने वाले आलू की कीमत सातवें आसमान पर है। आम तौर पर दस से बारह रुपये किलो बिकने वाले आलू इन दिनों 50 रुपए किलो बिक रहा है। रोज मजदूरी कर कमाने-खाने वाले गरीब लोगों के लिए अब आलू खरीदना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।इसी प्रकार प्याज 55 से 60 रुपए किलो, टमाटर 50 से 55 रुपए किलो,गोभी व नेनुआ 20 से 25 रुपए किलो, बैगन 20 से 25 रुपए किलो बिक रहा है।

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जबकि सब्जियों का जायका बढ़ाने वाले लहसुन 100 से 110 रुपए किलो,अदरक 90 से 95 रुपए किलो बिक रहा है।वहीं चटनी के काम आने वाले धनिया के पत्ते की महंगाई भी चरम सीमा पर है।यही स्थिति प्रोटीन प्रदान करने वाले दालों की है।अरहर की दाल 90 से 100 रुपए किलो,मसूर व चने की दाल 70 से 80 रुपए किलो बिक रहा है।इस कमरतोड़ महंगाई के चलते आम आदमी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।कम आय वाले व लम्बे परिवार वाले लोगों के लिए सब्जियों व दालों को खरीदने के लिए लम्बी बजट की जरूरत पड़ रही है।इस महंगाई को लेकर शासन-प्रशासन के प्रति लोगों में आक्रोश है।बुजुर्ग लोगों का कहना है कि दो -तीन दशक पूर्व दाल इतना सस्ता हुआ करता था कि गरीबों के लिए यह कहावत प्रचलित था कि- दाल रोटी खाएंगे, प्रभु का गुण गाएंगे।

अर्थात गरीब लोग दाल रोटी के सहारे ही जीवन यापन करते थे।लेकिन आज यह दाल गरीबों की थाली से दूर होती जा रही है।अब गरीब परिवारों के लिए आलू और दाल बड़ी महत्वपूर्ण चीज हो गई है।लोगों का कहना है कि एक तरफ कोरोना की मार ने गरीबों की स्थिति को अत्यंत खराब कर दिया है, वहीं दूसरी ओर सब्जियों व दालों की महंगाई ने कमर तोड़ दिया है।अतः शासन-प्रशासन को चाहिए कि वे आम जनता के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाले सब्जियों व दालों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठावें।