गोपालगंज: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष कैंप लगाकर महिलाओं को किया गया बंध्याकरण

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  • छोटा परिवार सुखी परिवार के प्रति किया गया जागरूक
  • सभी सरकारी अस्पतालो में उपलब्ध है परिवार नियोजन के साधन
  • आशा कार्यकर्ताओं ने निभायी महत्वपूर्ण भूमिका

गोपालगंज: जिले में परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। छोटा परिवार, सुखी परिवार के सपने को साकार करने के लिए हर किसी को आगे आने की जरूरत है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माझा में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ खुर्शीद आलम के उपस्थिति में डॉ विजय कुमार पासवान ने 17 महिलाओं को स्थाई बंध्याकरण किया। माझा ब्लॉक के विभिन्न पंचायतों के महिलाओं को स्थायी बंध्याकरण किया गया है। माझा ब्लॉक के आशा अपने – अपने क्षेत्र में परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। इसी का परिणाम है कि इतना ज्यादा महिलाओं का एक साथ ऑपरेशन किया गया। यदि कोई महिला ज्यादा बच्चे पैदा करती है तो माताएं अस्वस्थ होती है और दुर्बल अवस्था में जन्म लेने वाले बच्चे अस्वस्थ्य होते है। वर्तमान समय में परिवार नियोजन की दो तरह की सुविधाएं उपलब्ध है।अस्थाई परिवार नियोजन एवं स्थाई परिवार नियोजन है।परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधन जैसे छाया, माला, कंडोम, अंतरा, पी.पी.आई.सी.डी. इत्यादि उपलब्ध है। इसे इस्तेमाल करके अनचाहे गर्भ धारण से बच सकते है। परिवार नियोजन के स्थाई साधन जैसे पुरुष एवं महिलाओं का बंध्याकरण होता है। स्थाई बंध्याकरण करवाने से पहले सोच विचार करके स्थयी परिवार नियोजन को अपनाना चाहिए क्योंकि एक बार बंध्याकरण करवा लेने के बाद माता है। हमेशा के लिए गर्भधारण नहीं कर सकती है। छोटा परिवार सुखी परिवार इसकी विशेषताओं को समझते हुए योग दंपति को चाहिए कि परिवार नियोजन की तरीकों को अपनाना चाहिए। इस बंध्याकरण प्रोग्राम में माझा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बी.सी.एम. अंगद खुरवर,एवं यूनिसेफ के बी.एम.सी. नवीन कुमार एवं पी. सी.आई. के आर.एम.सी. बच्चू अलाम उपस्थित थे।

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नि:शुल्क सुविधाएं उपलब्ध :

अपने नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल में कोई भी योग पुरुष एवं योग महिलाएं संपर्क करें। सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाएं। योग पुरुष एवं योग महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पताल में नि:शुल्क बंध्याकरण किया जाता है एवं दवा भी मुफ्त में दिया जाता है। युग पुरुष एवं योग महिलाएं अस्थाई बंध्याकरण करवाते हैं तो ₹2000 दिया जाता है। आशा को 300 रुपया दिया जाता। यदि स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो तो हमे अपने क्षेत्र के मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) से सलाह अवश्य लेना चाहिए।

परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की नहीं:

सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी का बोझ आधी आबादी पर नहीं होना चाहिए। इन दिनों सरकार फैमिली प्लानिंग पर अधिक जोर दे रही है। खासकर इसमें पुरुषों की भागीदारी महिलाओं की तुलना में बेहद कम रहने पर इसे अभियान चलाकर जागरूक किया जा रहा है। परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है। महिलाएं तो तैयार हो जाती हैं। घर के मुखिया भी महिलाओं को ही आगे कर देते। इससे तो कभी बराबरी या सामाजिक सामंजस्य नहीं बनेगा।महिला-पुरुष नसबंदी जागरूकता अभियान चलाया जाता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों की भागीदारी कम है। इसके लिए उन्हें समय-समय पर शिविर व कार्यक्रम के माध्यम से प्रेरित किया जाता है।