इंपैक्ट: टीबी उन्मूलन के लिए नये-नये तकनीक से अवगत हो रहे है समुदाय के लोग

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  • समुदायस्तर तक सूचनाएं पहुंचाने में मीडिया बन रहा सशक्त माध्यम
  • 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए संकल्पित है विभाग
  • खांसी की आवाज से हो रही है टीबी की जांच

छपरा: स्वास्थ्य विभाग के द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में विभिन्न स्तर पर प्रयास किये जा रहें है। टीबी उन्मूलन के लिए विभाग के द्वारा नये-नये तकनीक का इजाद किया जा रहा है। ताकि टीबी मुक्त जिला का सपना साकार किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किये जा रहे प्रयासों को समुदाय स्तर तक पहुंचाने में मीडिया सशक्त माध्यम बन रहा है। मीडिया के माध्यम से नये-नये तकनीक से लोग अवगत हो रहे हैं। हाल हीं में स्वास्थ्य विभाग ने एक नया तकनीक का शुरूआत किया है। जिसमें खांसी के आवाज से टीबी की जांच की जा रही है। फिल्ड एप के माध्यम से टीबी मरीजों की जांच की जा रही है।

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टीबी के मरीजों की जांच के लिए अब बलगम नहीं, खांसी की आवाज के सैंपल लिए जाएंगे। सरकार ने एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए “फिल्डी एप” नाम से मोबाइल एप तैयार कराया है। कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सॉल्यूशन ट्रू डिटेक्ट टीबी प्रोग्राम के तहत इसका ट्रायल शुरू किया है। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत समय-समय से जांच, नियमित उपचार के साथ-साथ टीबी से बचाव के लिए कई कार्यक्रम हो रहे हैं।

उसी के तहत संक्रामक फेफड़े के टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले छह वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा एचआईवी संक्रमित बच्चों व वयस्कों को आइसोनिआजिड प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट दी जा रही है। टीबी चैंपियन के माध्यम से टीबी के प्रति समाज में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।

सरकार और विभाग प्रयास सराहनीय:

सारण जिले के रिविलगंज निवासी कन्हैया राय ने कहा कि टीबी उन्मूलन के दिशा में सरकार जो प्रयास कर रही है वो सराहनीय है। अखबार मैं प्रतिदिन पढ़ता हूं। एक दिन मैने पढ़ा था कि अब खांसी के आवाज से टीबी का जांच किया जायेगा। इसके साथ हीं टीबी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट की शुरूआत की गयी है। इन तमाम प्रयासों से जल्द हीं टीबी मुक्त जिला का सपना जो है वो साकार हो सकेगा। मीडिया के माध्यम से सरकार के तमाम कार्यक्रमों की जानकारी आसानी से मिल जाती है।

इस तरह की जानकारी मीडिया के माध्यम से हीं संभव:

आईएमए के सदस्य व शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों के प्रति समुदाय को जागरूक करने में मीडिया एक सशक्त माध्यम बन रहा है। टीबी उन्मूलन के दिशा में जो प्रयास किये जा रहे है उसके बारे में मीडिया में लगातार रिपोर्टस आ रही है। जिससे लोगों को नये-नये तकनीक के बारे में जानकारी मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस अभियान में मीडिया की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। समुदाय में जागरूकता लाना जरूरी है। फिल्ड एप के बारे में जानकारी मीडिया से हीं मिली। अगर यह रिपोर्ट मीडिया में नहीं आती तो इसके बारे में लोगों को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जाकर समझाना पड़ता और सूचनाएं पहुंचने में काफी समय लगता।