सिवान: शासन की सख्ती के कारण सड़क पर नहीं आए प्रदर्शनकारी

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परवेज अख्तर/सिवान: सोमवार को विभिन्न संस्थाओं और संगठनों द्वारा अग्निपथ योजना के विरोध में आहूत भारत बंद जिला प्रशासन की सख्ती के कारण पूरी तरह विफल रहा. जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण प्रदर्शनकारी सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा सके. भारत बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों के डर से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शहर में कम आए. शहर की प्रायः सभी निजी दुकाने एवं प्रतिष्ठान प्रतिदिन की तरह खुले रहे. सरकारी दफ्तरों में भी प्रतिदिन की तरह कार्य किए गए. भारत बंद के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन द्वारा सभी कोचिंग संस्थानों को बंद करा दिया गया था. जिलाधिकारी अमित कुमार पांडे ने कोचिंग संस्थानों को पूर्णतः बंद करने एवं उन पर विशेष तौर पर नजर रखने का निर्देश दिया था. प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों की गाड़ियां दिन भर सड़कों पर दौड़ती रही. जिला प्रशासन के अधिकारियों की गाड़ियों के बजते सायरन की आवाज से लोग अपने को प्रदर्शनकारियों से सुरक्षित महसूस कर रहे थे. जिलाधिकारी के निर्देश पर उन सभी स्थलों को खंगाला गया, जहां पर विधि व्यवस्था का उल्लंघन करने की संभावनाएं थी. जिन क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों द्वारा उपद्रव किए जाने की आशंका थी. उन क्षेत्रों में जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की पैनीनजर थी.

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चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती

दो दिनों से जिले में चल रहे आंदोलन और हिंसक रूप नहीं ले, इसलिए डीएम व एसपी खुद एक्शन में दिखे. जिलाधिकारी और एसपी ने संयुक्त आदेश जारी कर जिले के सभी चिन्हित स्थानों पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बलों की तैनाती कर दी. इसके बाद जिले का हर संभावित आंदोलन स्थल चप्पा चप्पा पुलिस से पटा रहा. शहर के जेपी चौक, गोपालगंज मोड़, बड़ी मस्जिद, रेलवे स्टेशन सहित कई अन्य स्थानों पर पुलिस बल के जवान तैनात थे. जिला प्रशासन के आला अधिकारी लगातार जिला मुख्यालय सहित प्रखंड क्षेत्रों में भी दौरा करके वहां की स्थिति का जायजा लेते दिखे.

ट्रेन रद्द होने से बस स्टैंड में लगी रही यात्रियों की भीड़

सबसे बड़ी बात यह कि रोज की तरह सोमवार को स्टेशन रोड सन्नाटे में गुम हो गया था. पैसेंजर ट्रेनों के नहीं चलने की वजह से यात्रियों की सबसे अधिक भीड़ बस स्टैंड में दिखी. बहुत से यात्री बस के ऊपर छत पर यात्रा करने को मजबूर हुए. भारत बंद का ऐलान के बाद जिले में किसी भी राजनीतिक दल की गतिविधियां नजर नहीं आई.