यासीन का शव पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम

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परवेज अख्तर/सिवान :- जैसे ही ट्रेन हादसे का शिकार मृतक यासीन मियां का शव उसके पैतृक गांव मुसेहरी कैलगढ़ पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों के चीत्कार से पूरा गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। बुधवार की देर शाम शव आने की सूचना पर बच्चे से लेकर बूढ़े तक यासीन के घर के तरफ दौड़ पड़े। मृतक यासीन मियां अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था जो गाड़ी चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। लेकिन काल क्रुर बनकर आई। ट्रेन ने उसके परिवार की सारी खुशियां पल भर में छीन ली। बता दें गोपालगंज के जंगलिया मोहल्ला निवासी शमशाद अली के घर आई बरात की विदाई करा कर से सिवान स्टेशन आ रहा था तभी सिवान के छोटपुर गांव स्थित मानव रहित फाटक पर सिवान से थावे जा रही पैसेंजर ट्रेन 55110 डाउन सवारी गाड़ी के चपेट में कार आ गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस घटना में यासीन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि गाड़ी में सवार दुल्हा आमिर, दूल्हन शना शमशाद, उमराना खातून, सैफ अली, बच्ची सेजा खातून गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं चालक यासीन के शव ग्रामीणों के सहयोग से पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को काटकर उसमें फंसे चालक यासीन के शव को निकाला। पुलिस ने पोस्टमार्टम करा शव को परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम के बाद यासीन का शव गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। चारो ओर चीख-पुकार की आवाज से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। दूसरे दिन गुरुवार को मृतक के रिश्तेदार एवं शुभचिंतकों का आना जारी रहा।

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पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

मृतक यासीन की विधवा यास्मीन खातून का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार पति की याद में बेहोश जा रही थी तथा शव से लिपट दहाड़ मारकर रो रही थी। ज्ञात हो कि यासीन के शाइस्ता, अल्फी और पुत्र शाहिल सभी अबोध बच्चे हैं। सभी पिता को देख रो रहे थे जिसे वहां उपस्थित लोग सांत्वना दे रहे थे। इस प्रकार अबोध बच्चों के सर से पिता को साया उठ जाने से बच्चों के जीवन पर ग्रहण लग गया है।

यासीन के अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैकड़ों ग्रामीण

बुधवार की देर शाम यासीन का शव का गांव के ही कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसमें सैकड़ों ग्रामीण उसके जनाजे की नमाज में शामिल हुए।[sg_popup id=”5″ event=”onload”][/sg_popup]