कोरोना के खिलाफ जंग में ‘देवदूत’ बने हैं आयुष चिकित्सक, अब तक 40 हजार लोगों को क्वारेंटाइन कर संक्रमण से बचाया

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  • 110 कोरोना संक्रमित में से 76 व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ
  • जिले में कोरोना से जंग में अपने कर्तव्यों को बखूबी निभा रहें 68 आयुष चिकित्सक

गोपालगंज : वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग में जिले के आयुष चिकित्सक देवदूत बन उभरे हैं। एक तरफ कोरोना जैसी भयंकर महामारी का दंश झेल रहा पूरा देश हलकान है तो वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मी खासकर चिकित्सक अपने कर्तव्यों को बखूबी निभा रहें है। आज के समय में कोरोना से संबंधित या संदिग्ध मरीजों से बात करना तो दूर की बात है, कोई भी व्यक्ति पास नहीं जाना चाहता है। जबकि चिकित्सा दल के सदस्य वैसे व्यक्तियों के पास जाकर बिना किसी भय के उसकी स्वास्थ्य जांच करते है और प्रतिदिन अपने विभाग को दैनिक प्रतिवेदन उपलब्ध कराते हैं। हम बात कर रहे हैं गोपालगंज जिले के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं मेन स्ट्रीम के सभी आयुष चिकित्सकों की जो आवंटित क्षेत्र के क्वारेंटाइन सेंटर पर बाहर से आये सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग करने या क्षेत्र के ग्रामीण व जनप्रतिनिधियों के द्वारा दिये गए सूचना के आधार पर बाहर से आये हुए यात्रियों की स्क्रीनिंग एवं फॉलो-अप करने के लिए निकल पड़ते हैं। पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक के सभी कोरेन्टीन सेंटर पर स्क्रीनिंग के दौरान कोरोना से संबंधित किसी भी तरह का लक्षण मिलने पर उन्हें संदिग्ध मानते हुए थ्रोट स्वाब जांच के लिए गोपालगंज ज़िला मुख्यालय में भेज दिया जाता है।

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कोरोना से लड़ने फ्रंटलाइनर की भूमिका निभा रहें आयुष चिकित्सक

सीएचसी बैकुंठपुर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ० आफ़ताब आलम ने बताया कोरोना से लड़ने के लिए फ्रंट लाइन में आयुष चिकित्सक है जो बिना किसी डर के निःसंकोच बाहर से आये हुए यात्रियों की स्क्रीनिंग कर रहे है। वही अन्य चिकित्सक डॉ अंकुर कुमार श्रीवास्तव,डॉ के०पी० सिंह,डॉ वज़ीरुल हक, डॉ सरिता कुमारी,डॉ मधुकर श्रीवास्तव, डॉ रविशंकर कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा, डॉ अजय कुमार समेत सभी आयुष चिकित्सक अपने कर्तव्यों को निभा रहें हैं।

68 आयुष चिकित्सक लड़ रहे कोरोना से जंग

आरबीएसके ज़िला समन्वयक डॉ अमित कुमार रंजन ने बताया आरबीएसके( राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) अपने टीम के साथ वरीय पदाधिकारी के आदेशानुसार प्रतिदिन ईमानदारी एवं निष्ठा पूर्वक इतना जोखिम भरा कार्य कोरोना फाइटर के रूप में कर रहे है। जिले में आयुष चिकित्सकों की संख्या 68 हैं। जिसमें 44 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, 21 मेन स्ट्रीम आयुष चिकित्सक तथा 3 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत हैं। फिलहाल सभी कोरोना से जंग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें है।

बाहर से 3 आये लाख व्यक्तियों का हुआ रजिस्ट्रेशन

जिले में बाहर से आये 3 लाख व्यक्तियों का रजिस्ट्रेशन आयुष चिकित्सकों के टीम के द्वारा किया गया है। साथ हीं अब 40 हजार लोगों को क्वारेंटाईन कर कोरोना संक्रमण से बचाने में महत्वपूण सफलता मिली है। जिले में अब तक 110 कोरोना के पॉजिटिव मामले पाये गये हैं। जिसमें 76 कोरोना के पॉजिटिव व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।

अपनी नहीं देश की परवाह सर्वोपरि

आयुष चिकित्सक डॉ. आफताब आलम ने बताया कोरोना माहमारी के चलते देश संकट से गुजर रहा है। ऐसे में चिकित्सक अपनी परवाह छोड़ अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। आरबीएसके ने कोविड-19 को हराने के लिए अपना योगदान देना सुनिश्चित किया है। जन सहयोग से कोरोना शीघ्र हारेगा।

सामाजिक दूरी से लगेगा कोरोना संक्रमण पर अंकुश

आयुष चिकित्सक डॉ सरिता कुमारी कहती हैं कि सामाजिक दूरी और सफाई से कोरोना संक्रमण के प्रसार पर शीघ्र अंकुश लग जाएगा। कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच बिना सुरक्षा ड्रेस के जाना खतरों से खाली नहीं है। अभी भी कोरोना का संक्रमण जिले से खत्म नही हुआ है. इसलिए आम व्यक्ति को वगैर मास्क के बाहर नहीं निकलना चाहिए।