अब आरोग्य दिवस पर की जाएगी एचआईवी- एड्स जांच, किया जायेगा जागरूक

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  • सभी प्रखंडों के स्वास्थ्य प्रबंधकों के साथ की गयी बैठक
  • बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने दिया निर्देश
  • आरपीएमयू सभाकक्ष में आयोजित की गयी बैठक

छपरा: अब जिले में आरोग्य दिवस पर भी एचआईवी- एड्स जांच की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी कर ली है। सोमवार को सदर अस्पताल के आरपीएमयू सभा कक्षा में जिले के सभी प्रखंडों के स्वास्थ्य प्रबंधकों के साथ बैठक आयोजित की गयी। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति तथा एचएलएफपीपीटी के संयुक्त तत्वाधान में संचालित ईएमटीसीटी की मासिक बैठक की गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा ने कहा कि गांवों में आयोजित किये जाने वाले आरोग्य दिवस पर एचआईवी और एड्स की जांच की जाये। शिविर में लोगों को एड्स के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूक भी किया जायेगा। लोगों को एड्स से बचाव के लिए जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी जायेगी। इसमें असुरक्षित यौन संबंध से दूर रहने, खून चढ़ाने से पहले खून की जांच कराने तथा एक सुई से एक के अलावा किसी और को सुई नहीं लेने की सलाह दी जायेगी। उन्होंने कहा कि निर्देश के तहत संस्थागत प्रसव कराने वाली हर गर्भवती महिला का एचआईवी जांच किया जायेगा। आरोग्य दिवस के दिन सभी गर्भवती की एचआईवी जांच की जाए। ज्यादा से ज्यादा गर्भवतियों की जांच करने की बात कही गई। जहां टेस्टिंग ग्रेड नीचे चला गया है। उसको एक श्रेणी में लाने की बात कही गयी। बैठक में सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा के अलावा जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार शर्मा, एआरटी सेंटर के मेडिकल ऑफिसर मनकेश्वर चौधरी, डीपीएम अरविंद कुमार, अहान के पीओ अजय कुमार बरनवाल, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डाक्टर रंजितेश कुमार, यूनिसेफ के एसएमसी आरती त्रिपाठी, सुजीत कुमार शामिल थे।

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पीड़ित रोगी का मुफ्त इलाज होता है

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव मामलों के पीड़ित रोगियों की मुफ्त चिकित्सा की जाती है। एचआईवी पॉजिटिव की स्थिति के मुताबिक उन्हें अलग-अलग अवधि की दवा दी जाती है । इस इलाज के दौरान रोगी पर नियमित रूप से नजर रखी जाती है। गर्भवती महिला में पॉजिटिव केस मिलने पर गर्भस्थ शिशु को इससे बचाने के लिए प्रसव से पहले ही उसका भी इलाज शुरू कर दिया जाता है। अगर नवजात शिशु इससे ग्रसित मिला तो उसका इलाज अलग से किया जाता है ।

से हो सकता है एचआईवी

  • एक से अधिक लोगों से असुरक्षित यौन संबंध से
  • एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
  • संक्रमित सुई एवं सिरिंज के इस्तेमाल से
  • एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को

यह बरतें सावधानी

  • शादी से पहले युवक-युवती एचआईवी जांच कराएं
  • असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त सुई से बचें
  • सामान्य व्यक्ति भी बच्चों की जांच कराएं
  • पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
  • धूम्रपान, मदपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
  • व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें

यह हो सकते हैं एचआईवी के लक्षण

  • वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
  • गले-मुंह में लगातार छाले रहना
  • उल्टी व दस्त की समस्या
  • खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना