कालाजार उन्मूलन में आईएमए चिकित्सकों की सहभागिता जरूरी: सिविल सर्जन

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  • सदर अस्पताल में एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
  • कालाजार उन्मूलन में निजी चिकित्सकों की भूमिका पर हुई चर्चा
  • 2021 तक कालाजार उन्मूलन का है लक्ष्य

गोपालगंज: सदर अस्पताल के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में कालाजार उन्मूलन को लेकर आईएमए के साथ एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. त्रिभुवन नारायण सिंह ने की। सिविल सर्जन डॉ टीएन सिंह ने कहा कि कालाजार उन्मूलन में आईएमए की चिकित्सकों की अहम भूमिका है। इस अभियान में उनकी सहभागिता अति आवश्यक है। कालाजार उन्मूलन में निजी चिकित्सकों की सहयोग अपेक्षित है। सिविल सर्जन डॉ टीएन सिंह ने आइएमए चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले कालाजार मरीजों की स्वास्थ्य में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करें एवं कालाजार मरीजों की पहचान में स्वास्थ्य विभाग की सहयोग करें। ताकि वर्ष 2021 तक जो कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है उसकी प्राप्ति की जा सके। सिविल सर्जन ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए जिले में अभियान की शुरुआत की जाएगी। इससे बचाव के लिए समय-समय पर छिड़काव का भी कार्य किया जाता है। इस कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ टीएन सिंह, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एके चौधरी, डीएमओ डॉ हरेंद्र प्रसाद सिंह, केयर इंडिया के राज्य पदाधिकारी डॉक्टर अनिंद्र नाथ बनर्जी, डीपीओ आनंद कश्यप तथा आईएमए के अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

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मरीजों को दे कालाजार से बचाव की जानकारी

कार्यशाला के दौरान डीएमओ डॉ हरेंद्र प्रसाद सिंह ने आईएमए के चिकित्सकों से यह अपील किया कि निजी स्वास्थ्य संस्थान में आने वाले मरीजों को कालाजार से बचाव के लिए काउंसलिंग करें तथा इससे बचाव व उपचार के बारे में उन्हें संपूर्ण जानकारी दें।

कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह

केयर इंडिया के राज्य पदाधिकारी डॉ अनिंद्र नाथ बनर्जी ने कहा कि कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह है। इस बीमारी को जन-जागरूकता व सामूहिक सहभागिता से ही हराया जा सकता है। कालाजार तीन तरह के होते हैं । जो वीएल कालाजार, वीएल प्लस एचआइवी और पीकेडीएल हैं । बताया कि कालाजार रोग लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी काटने से फैलता है। साथ ही यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है।

रोगी को श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाती है राशि

कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं आशा को कालाजार के रोगियों को अस्पताल लाने की दिशा में प्रोत्साहन राशि 100 रुपये प्रति मरीज की दर से भुगतान किया जाता है। कालाजार मरीजों को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत भुगतान प्रक्रिया को भी सरल बना दिया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भर्ती होने वाले मरीजों को वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा राशि का भुगतान किया जाता है।