कोरोना योद्धा बना सफाईकर्मी शिवानदन का पूरा परिवार, मुश्किल वक्त में भी इनके लिए स्वच्छता से बढक़र कुछ भी नहीं

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  • स्वच्छता के ये कर्मवीर लोगों के लिए बने नजीर
  • आईसोलेशन सेंटर की साफ-सफाई में जुटा पूरा परिवार
  • अपनी सुरक्षा करते हुए कर रहें साफ-सफाई

छपरा: कोरोना की रोकथाम में साफ़-सफ़ाई की उपयोगिता पहले ही साबित हो चुकी है. ऐसे में एक पूरा परिवार हाथों में झाडू थामकर कोरोना को हराने के लिए निकल पड़े यह संभव प्रतीत नहीं होता है. लेकिन जिले के शिवानदन बासफोड़ के साथ उनका पूरा परिवार इसे हकीकत में बदल रहे हैं. जिले के आईसोलेशन वार्ड के में सफाई में शिवानदन बासफोड़ के साथ उनका पूरा परिवार जुटा है. करीब छह माह से उनका पूरा परिवार आईसोलेशन सेंटर की साफ-सफाई करने में ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहा है। कोरोना के खिलाफ़ इस मुहिम में गंदगी को दूर करने वाले ये सफाई कर्मचारी किसी असली योद्धा से कम नहीं है. इनका यह प्रयास सिर्फ़ गंदगी दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये ऐसे कई लोगों को प्रेरित भी कर रहे हैं जो साफ़-सफाई की उपयोगिता को नजरंदाज करते हैं.

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पूरा परिवार करता है सफाई का काम

जिले के सदर अस्पताल में बने आईसोलशेन सेंटर और कोविड केयर सेंटर में साफ सफाई के कार्य की जिम्मेदारी सारण जिले के गड़खा प्रखंड के मैकी गांव निवासी शिवानदन बासफोड़ के पूरे परिवार ने उठाया है। शिवानदन बासफोड़, उनकी पत्नी अकली देवी, बेटा चंदन बासफोड़, किशन बासफोड़, मुकेश बासफोड़, हीरो बासफोड़, बेटी रेखा देवी और दमाद अनिल मली मिलकर आईसोलेशन सेंटर की साफ-सफाई कर रहे हैं. हाउस कीपिंग मैनेजर संजय कुमार सिंह ने बताया शिवानदन एवं उनका पूरा परिवार उस परिस्थिति में इस आईसोलेशन सेंटर की सफाई का जिम्मा उठाया जब कोई भी व्यक्ति इसके आस-पास आने से डरता था। यहां तक की कोई दूसरे सफाईकर्मी यहां अपनी सेवा देने को तैयार नहीं थे। लेकिन शिवानदन के पूरे परिवार यहां पर कार्य करने को तैयार हुए जो पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से अपना कार्य कर रहें है।

बेहतर प्रदर्शन की है कोशिश

सफाई कर्मी शिवानदन बासफोड़ ने बताया अस्पताल के सबसे विशेष वार्ड की सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी उन्हें मिली है, जिसे वह बखूबी अंजाम दे रहे हैं. उन्होंने बताया अभी तक तो एक सफाई कर्मी के ही रूप में उन्होंने सेवा दी थी. लेकिन जब से उनके साथ उनका पूरा परिवार आईसोलेशन सेंटर एवं कोविड केयर सेंटर में साफ़-सफ़ाई करना शुरू किया, तबसे स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आम लोग भी उनके कार्य की प्रशंसा करते हैं. एक सफाई कर्मी से एक कोरोना योद्धा का तमगा उनके साथ उनके परिवार में उत्साह भर देता है. वह कहते हैं कोरोना संक्रमण के प्रसार में भले ही वृद्धि हुयी हो, लेकिन समय के साथ लोगों के मन में स्वच्छता को लेकर सतर्कता भी बढ़ी है. यह एक सकारत्मक पहल है. उन्होंने बताया उनके साथ उनका पूरा परिवार अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से पूरा करने की कोशिश में जुटा है.

भय में फंसकर नहीं गवाएंगे मौका

आईसोलेशन वार्ड के सफाई कर्मी शिवानदन बासफोड़ की पत्नी अकली देवी ने बताया कोरोना के लेकर चल रहीं भ्रांतियों ने भय का माहौल बना दिया है, लेकिन वह इसे एक मौके के रूप में देखती हैं. यद्यपि, वह साफ़-सफाई के दौरान कोरोना रोकथाम के उपायों का अनुपालन जरुर करती हैं.

24 घंटे में तीन बार होती है साफ-सफाई

सदर अस्पताल के आईसोलेशन सेंटर में विशेष रूप से साफ-सफाई का ख्याल रखा जा रहा है। छह सफाईकर्मियों को रखा गया है। 24 घंटे में तीन बार आईसोलेशन सेंटर साफ-सफाई की जाती है। हाईपोक्लोराइट से पूरा फर्श को पोछा लगाया जाता है। ताकि किसी तरह के संक्रमण का प्रसार नहीं हो सके।

पीपीई कीट पहनकर योद्धा का होता है एहसास

आईसोलेशन सेंटर में सफाईकर्मी अपनी सुरक्षा के प्रति काफी सर्तकता बरत रहें हैं। सफाई के दौरान सभी को पीपीई कीट, मास्क, गल्ब्स, सेनिटाईजर एवं साबुन आदि दिया जाता है। सफाईकर्मी अनिल मली ने बताया वह जब पीपीई किट्स पहनते हैं तब एक चिकित्सक की तरह उन्हें भी योद्धा का एहसास होता है. पीपीई कीट पहनने की आदत नहीं होने से उन्हें कुछ तकलीफ भी होती है. लेकिन इसे पहनने से उन्हें जिम्मेदारी का भी एहसास होता है. उन्होंने बताया उनकी तरह अन्य सफाई कर्मियों का डॉक्टर हौसला भी बढ़ाते है, जिससे उनकी अपने कार्य के प्रति और जिम्मेदारियां बढ़ जाती है.