दोस्ती में पड़ी दरार, एक-दूसरे के खून प्यासे थे धर्मा और कारू! जमुई में अपराध का एक अध्याय समाप्त

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पटना: कुख्यात धर्मा व कारू में कभी दांतों कटी दोस्ती थी, लेकिन जब दोस्ती में दुश्मनी ने जन्म लिया तो इसकी भी कहानी बननी ही थी। कारू कभी मगही गांव के कुख्यात धर्मा पासवान का दाहिना हाथ हुआ करता था। एक वर्ष पहले दोनों में दुश्मनी हो गई और दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए थे। हालांकि जिले के कई थानों का सिरदर्द रह चुका कारू पासवान की हत्या से पुलिस ने राहत की ही सांस ली होगी।

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18 साल पूर्व अपराध की दुनिया में कारू ने रखा था कदम: वर्ष 2004 में कारू ने अपराध की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था। हत्या की घटना से आपराधिक अध्याय की शुरूआत की थी जो 2006 में धर्मा पासवान के साथ परवान पर चढ़ गया। हत्या, अपहरण, लूट, फिरौती, डकैती जैसे कई संगीन घटनाओं को अंजाम देकर अपराध की सीढ़ियां चढ़ते हुए धर्मा के साथ मिलकर भी एक से बढ़कर एक घटना को अंजाम दिया।

दूसरे राज्य में भी दर्ज है मामले

झाझा व लक्ष्मीपुर थाना के अलावा झारखंड के कई थाना में कारू के विरुद्ध कई मामले दर्ज हैं। सिर्फ झाझा में ही कारू ने 10 से अधिक आपराधिक घटना को अंजाम दिया था। आज भी शहरवासियों में कारू के नाम की दहशत देखी जाती है। चांदवारी मुहल्ले का हर व्यक्ति कारू के साथ खड़ा रहता था। नियति को खेल इसी मुहल्ले और अपने घर में ही कुख्यात हत्या हो गई और दहशत का एक अध्याय समाप्त हो गया।

पूर्व में कारू पर हुआ था हमला

2020 में कारू पासवान अपने घर के आगे बजरंगवली मंदिर के पास बैठा था। इसी दौरान धर्मा पासवान ने कारू पर गोलीबारी की थी, लेकिन कारू बच गया था। इस मामले में कारू ने थाना में केस दर्ज कराया था। कारू के स्वजन ने बताया कि कारू की हत्या करने के लिए धर्मा पासवान ने कई बार प्रयास किया। कई बार जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के अनुसार कारू पासवान पर दर्ज कई मामले में धर्मा पासवान का भी नाम शामिल है। कारू के ऊपर थाना में कांड संख्या 57/04, 19/06, 20/06, 31/06, 79/06, 27/07, 105/16, 395/17 एवं 83/19 मामला दर्ज है।